ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त साॅलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने कहा कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) और यंग इंडियन के बीच हुआ लेनदेन दिखावटी और फर्जी था। वहीं, सभी आरोपियों ने ईडी के आरोपों को सिरे से खारिज किया है
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को राउज एवेन्यू कोर्ट स्थित विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत में नेशनल हेराल्ड से जुड़े धनशोधन मामले में आरोपियों की ओर से पेश अंतिम दलीलों का कड़ा विरोध किया। मामले की अगली सुनवाई 12 जुलाई को होगी।
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ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त साॅलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने कहा कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) और यंग इंडियन के बीच हुआ लेनदेन दिखावटी और फर्जी था। उन्होंने अदालत को बताया कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) द्वारा दिए गए 90 करोड़ रुपये का जिस तरह से उपयोग किया गया, उससे आपराधिक विश्वासघात का स्पष्ट मामला बनता है।
ईडी ने कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, आस्कर फर्नांडीस, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और यंग इंडियन कंपनी पर षड्यंत्र रचकर धनशोधन के जरिये एजेएल की दो हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया है।
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एजेंसी का दावा है कि गांधी परिवार यंग इंडियन में 76 फीसदी हिस्सेदारी रखता है और इस हिस्सेदारी के माध्यम से एजेएल की संपत्तियों को मात्र 90 करोड़ रुपये के ऋण के बदले हथिया लिया गया। ईडी ने मामले में धनशोधन निरोधक अधिनियम (पीएमएलए) की धारा तीन और चार के तहत सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। वहीं, सभी आरोपियों ने ईडी के आरोपों को सिरे से खारिज किया है और आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के विरोध में अदालत में अपनी दलीलें रखी हैं।