अब पॉश कालोनी हो, सामान्य या मलिन बस्ती, दुकानों और शोरूमों के सामने की सड़क की चौड़ाई अगर बराबर होगी तो हाउस टैक्स भी बराबर ही चुकाना पड़ेगा।
रिहायशी भवनों पर यह नियम पहले से लागू है, लेकिन अब नई कॉमर्शियल टैक्स पॉलिसी में व्यावसायिक संस्थानों के लिए भी यह नियम लागू कर दिया गया है।
पॉश कालोनियों और मलिन बस्तियों में एक समान टैक्स निर्धारण का यह मुद्दा बुधवार को होने वाली बोर्ड बैठक में भी गूंजेगा। पार्षद इसका विरोध करने की तैयारी कर रहे हैं।
दरअसल, मकानों पर टैक्स लगाने का फार्मूला सरकार ने करीब 10 साल पहले ही बदलकर सेल्फ असेसमेंट स्कीम लागू कर दी थी।
अब बीते साल से शासन ने कॉमर्शियल बिल्डिंगों पर टैक्स निर्धारण के लिए भी नई नीति पास की थी। एक साल तक यह नीति अटकी रही। निगम ने अब इस नई नीति के मुताबिक टैक्स निर्धारण शुरू कर दिया है।
तीन कैटेगरी के मुताबिक होगा टैक्स निर्धारण
नई पॉलिसी के मुताबिक कॉमर्शियल बिल्डिंगों पर भी रेजिडेंशियल पॉलिसी के अनुसार ही तीन कैटेगरी में टैक्स निर्धारण होगा।
12 मीटर तक चौड़ी सड़क किनारे बने शोरूम या दुकानों पर 66 पैसे प्रति वर्ग फुट, 12 से 24 मीटर चौड़ी सड़क पर 83 पैसे और 24 मीटर से चौड़ी सड़क पर स्थित इमारतों पर 1 रुपया प्रति वर्ग फुट की दर से टैक्स निर्धारण होगा।
इसमें भी अस्पताल, होटल्स, शोरूम व अन्य इमारतों के लिए आवासीय दरों का 2 से 6 गुना तक टैक्स लगाया जाएगा।