आप के के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब की तीर्थयात्रा बसों की सुरक्षा जांच को लेकर एनएचआरसी पर पक्षपात का आरोप लगाया। वहीं आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने पलटवार करते हुए देशभर में 1,000 से अधिक असुरक्षित बसों पर कार्रवाई का दावा किया और केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना की बसों को चुनिंदा तरीके से निशाना बना रहा है। एनएचआरसी ने इन राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया। आयोग ने बसों में यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान द्वारा निर्धारित मानकों का हवाला दिया।
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केजरीवाल ने मानवाधिकार आयोग की सुरक्षा जांच के उद्देश्य पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि केवल पंजाब की तीर्थयात्रा बसों की जांच की जा रही है, जबकि अन्य राज्यों के परिवहन बेड़ों की जांच नहीं हुई। केजरीवाल ने कहा कि एनएचआरसी ने अपने इतिहास में पहली बार बसों का निरीक्षण किया है। उन्होंने बताया कि यह निरीक्षण पंजाब के लोगों को तीर्थयात्रा पर ले जाने वाली सुपर डीलक्स बसों का था।
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केजरीवाल ने बसों में चालक और यात्रियों के बीच विभाजन जैसी कमियों पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या एनएचआरसी ने यूपी रोडवेज या किसी अन्य राज्य की बसों का निरीक्षण किया है। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी पर बुजुर्गों की तीर्थयात्रा रोकने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे बहुत पाप लगेगा। उन्होंने कहा कि सभी पंजाबी उन्हें कोसेंगे।
एनएचआरसी की कार्रवाई और शिकायतें
केजरीवाल की प्रतिक्रिया एनएचआरसी की उस कार्रवाई के बाद आई। आयोग ने पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना की असुरक्षित बसों पर संज्ञान लिया था। इस योजना का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को तीर्थयात्रा की सुविधा देना है। शिकायत में बसों की संरचना में अनधिकृत बदलावों की चिंता जताई गई थी। इनमें चालक के केबिन और यात्री हिस्से के बीच विभाजन तथा दरवाजे लगाना शामिल था। आपातकालीन निकास, खिड़कियों में बाधा और आग बुझाने की व्यवस्थाओं में कमियों का भी उल्लेख था।
सुरक्षा मानकों पर एनएचआरसी का बचाव
एनएचआरसी के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने केजरीवाल के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट के जरिये तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने अभी तक कमीशन की जांच शुरू नहीं की है। कानूनगो ने बताया कि पुणे स्थित केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान (सीआईआरटी) के राष्ट्रीय सुरक्षा दिशानिर्देशों में स्लीपर बसों में चालक और यात्रियों के बीच विभाजन को खतरनाक बताया गया है। उन्होंने कहा कि देशभर में स्लीपर कोच बसों में आग लगने की घटनाओं में नागरिकों की जान गई है। सीआईआरटी ने पुष्टि की है कि यह विभाजन सुरक्षा दिशानिर्देशों के खिलाफ है।
देशव्यापी कार्रवाई और चेतावनी
कानूनगो ने स्पष्ट किया कि एनएचआरसी की कार्रवाई केवल पंजाब तक सीमित नहीं है। यह देशव्यापी स्तर पर की जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान विभिन्न राज्यों में 1,000 से अधिक असुरक्षित बसों को सड़कों से हटाया गया है। इन बसों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई है। कानूनगो ने आप संयोजक पर निशाना साधते हुए कहा कि केजरीवाल को कमीशन के लिए निर्दोष लोगों की जान जोखिम में डालना बंद करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी अराजकता और तानाशाही के कारण किसी नागरिक की जान खतरे में पड़ती है, तो वह फिर से जेल पहुंच जाएंगे।