पार्टी ने हाल ही में कहा था कि दिल्ली में सियासी जमीन बना लेने के बाद आप के शीर्ष नेता लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार अभियान का हिस्सा रहेंगे।
दिल्ली में प्रचार का जिम्मा स्थानीय प्रत्याशियों पर रहेगा। पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल बस प्रत्याशियों की मदद के लिए ही दिल्ली में नजर आएंगे।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब केजरीवाल ने खुद ही दिल्ली में चुनावों की बागडोर अपने हाथों में ले ली है। उन्होंने 10 अप्रैल को होने वाले मतदान के बाद ही दिल्ली छोड़ने का निर्णय किया है।
कहां चला गया मजबूत जनाधार?
पार्टी प्रवक्ता दिलीप पांडेय के मुताबिक, दिल्ली में पार्टी का मजबूत जनाधार है। इसके लिए केजरीवाल की देश भर में रैलियां होनी हैं। इस व्यस्तता के चलते केजरीवाल अब दिल्ली के लिए ज्यादा समय नहीं निकाल सकेंगे।
लेकिन अचानक पार्टी ने सुर बदल दिया है। सोमवार शाम अरविंद केजरीवाल ने द्वारका में जनसभा को संबोधित किया। यहीं नहीं उम्मीदवारों के लिए वोट भी मांगे। जबकि पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व का अब यहां ज्यादा दखल नहीं रखनी चाहिए।
विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने सघन प्रचार अभियान चलाकर मजबूत जनाधार बना लिया था। लेकिन अचानक से यह जनाधार खिसकने लगा है। इसलिए केजरीवाल ने अपने कार्यक्रमों में भारी फेरबदल कर दिल्ली की कमान अपने हाथों में ले ली है।
बदल गया केजरीवाल का फोकस!
पार्टी ने दिल्ली के कार्यकर्ताओं को हिदायत दी गई है कि वैसे ही प्रचार करें जैसे केजरीवाल ने विधानसभा चुनावों के दौरान किया था।
क्योंकि आप संयोजक अरविंद केजरीवाल राष्ट्रीय प्रचार अभियान पर फोकर कर रहे हैं। लेकिन अब यह फोकस बदल गया है। केजरीवाल दिल्ली में प्रचार के लिए उतर गए हैं।
यहीं नहीं वह खुद वाराणसी से चुनाव लड़ रहे हैं और वहां उनकी टक्कर भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी से है। लेकिन इसके बावजूद जब तक दिल्ली में चुनाव नहीं हो जाते वह यहां से कहीं नहीं जाएंगे।
तो ये है केजरी के डर की वजह!
दरअसल, हाल ही कई सर्वे एजेंसियों ने आप के जनाधार को लगातार कम होते दिखाया है। इसमें खासकर दिल्ली में आप के जनाधार खिसकते हुए दर्शाया जा रहा है। एक टीवी चैनल के सर्वे में तो यहां तक दिखा गया कि दिल्ली और हरियाणा में पार्टी को गिने-चुने वोट मिलेंगे।
इससे डरे अरविंद केजरीवाल ने अपना इरादा बदला और खुद दिल्ली में प्रचार के लिए कूद पड़े। दरअसल, सोमनाथ भारती केस में धरने और दिल्ली में सरकार से इस्तीफा देने पर काफी समर्थकों ने आप से नाता तोड़ दिया था।
रही-सही कसर टिकट बंटवारे पर पार्टी में हुए घमासान ने पूरी कर दी। ऐसे में साफ-सुथरी और आम आदमी की पार्टी होने का दावा करने वाली आप से आम आदमी ने किनारा करना शुरू कर दिया। इससे डरे केजरीवाल ने फिर पार्टी की छवि सुधारने में लग गए हैं।
फिर तूफानी प्रचार के लिए उतरे
अरविंद केजरीवाल ने अब चुनावों तक दिल्ली में डेरा डालने का फैसला किया है। एक बार फिर वे तूफानी चुनाव प्रचार में लग गए हैं। उन्होंने सोमवार से दिल्ली में बड़ी जनसभाओं का दौर शुरू किया। इसके तहत वे सभी लोकसभा क्षेत्रों में बारी-बारी से बड़ी सभाएं करेंगे।
रोड शो व नुक्कड़ सभाओं के जरिए भी अपने समर्थकों का दायरा बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। दिल्ली का चुनाव संपन्न होने के बाद ही केजरीवाल दिल्ली से बाहर के इलाकों में प्रचार के लिए जाएंगे।
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आप की ओर से रिकार्डेड फोन संदेश के जरिए आम तौर से पूछे जाने वाले सवालों का जवाब भी दिया जा रहा है। दिल्ली में चुनाव होने में बचे आखिरी दस दिन में अपनी पूरी ताकत दिल्ली में झोंकने के लिहाज से आप की तैयारी हो चुकी है।