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PM मोदी के आगे केजरीवाल ने फिर ठोंकी ताल

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महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनावों में बेहतरीन सफलता हासिल करने के बाद अब भाजपा नेताओं ने दिल्ली में भी चुनाव कराने का फैसला कर लिया है। इस बारे में प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय के बयान के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनाप रुख साफ कर दिया है।
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मोदी ने स्पष्ट किया कि अगर भाजपा जोड़तोड़ कर सरकार बनाती है तो उसका सीधा फायदा आम आदमी पार्टी को ही होगा। ऐसे में दोबारा चुनाव कराने में ही समझदारी है।

विधानसभा भंग करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका की अगली सुनवाई 28 अक्तूबर हो है। माना जा रहा है कि इसी में भाजपा अपना जवाब दाखिल करते हुए दोबारा चुनाव कराने की मांग करेगी।
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अगर सुप्रीम कोर्ट इसे मान लेता है तो राजधानी में दिसंबर तक चुनाव होने की उम्मीद की जा सकती है।

मोदी होंगे चेहरा?

महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा में भाजपा की जीत से अब दिल्ली में भी चुनाव कराने की चर्चा तेज होती जा रही है। भाजपा में अब चर्चा जोरों पर है कि चुनाव प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर ही लड़ा जाए। क्योंकि दोनों राज्यों में यह फॉर्मूला हिट रहा है।

लिहाजा दिल्ली में भी अगर चुनाव होते है तो बिना किसी नेता के ही चुनाव लड़ा जाए। ऐसा इसलिए भी है कि कांग्रेस में भी अब पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कद का कोई नेता नहीं है। साथ ही वर्तमान में दिल्ली भाजपा में केजरीवाल की टक्कर का कोई बड़ा चेहरा नजर नही आता।

भाजपा नेताओं का तर्क है कि पूर्व मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना के बाद केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज, प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा और डॉ. हर्षवर्धन को चेहरा तो पेश किया गया लेकिन पार्टी लगातार तीनों बार हारी। अगर आम आदमी पार्टी को शिकस्त देनी है तो बिना चेहरे के जाना होगा। प्रदेश के कई नेता इस सोच को केंद्रीय नेतृत्व को भी अवगत करा चुके हैं।

मोदी को भी सता रहा है ये डर

पार्टी सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में तो मुख्यमंत्री के दावेदार प्रो. जगदीश मुखी, विजय गोयल, डॉ. हर्षवर्धन, मीनाक्षी लेखी, सतीश उपाध्याय तो हैं, लेकिन राय एक नहीं है। लिहाजा इससे अंदरूनी कलह भी नहीं होगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद डॉ. हर्षवर्धन का स्‍थानीय स्तर पर दिल्ली से जुड़ाव कम हो गया है। हालांकि वह चांदनी चौक से सांसद हैं लेकिन फिर भी सीएम पद के दावेदार के तौर पर उनका नाम बहुत पीछे है।

लोकसभा चुनाव के समय किरण बेदी को दिल्ली की मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट करने की चर्चा उठी थी लेकिन बाद में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने इसे खारिज कर दिया था।

अब चर्चा ये है कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का नाम तय करना घाटे का ठीक नहीं होगा। क्योंकि इससे वोट बंटने का भी डर रहता है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही एक मात्र ऐसा चेहरा हैं जिनके बल पर भाजपा दिल्ली में भी चुनाव जीतने का दम भर सकती है।
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केजरीवाल ने कुछ यूं ठोंकी ताल

लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बनारस सीट पर बुरी तरह हारने वाले अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली चुनावों में मोदी के आगे आने की चर्चाओं पर उन्हें चुनौती दे डाली है।

केजरीवाल का कहना है कि महाराष्ट्र और हरियाणा की तर्ज पर यदि भाजपा दिल्ली में भी मोदी लहर के भरोसे चुनाव जीतना चाहती है तो उसका ये सपना पूरा नहीं होगा। दोनों राज्यों में भाजपा के पास कोई स्टार चेहरा नहीं था यही वजह है कि मोदी का जादू चल गया, लेकिन दिल्ली में ये दांव नहीं काम आएगा।

दिल्ली के पूर्व सीएम केजरीवाल ने कहा कि राजधानी में चुनाव होने की सूरत में भाजपा को आम आदमी पार्टी से कड़ी टक्कर मिलेगी और उनकी पार्टी भाजपा को बड़े अंतर से हराएगी।

आप नेताओं का दावा है कि अगर चुनाव हुए तो उनकी पार्टी पूर्ण बहुमत से सत्ता में आएगी। मोदी लहर की असली परीक्षा दिल्ली चुनावों में ही होगी।
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