अरुणा शानबाग का गुनहगार सोहनलाल एनटीपीसी में सफाई कर्मचारी का काम करता रहा, लेकिन इसकी भनक किसी को नहीं लगी थी।
उसका बनावटी मासूम चेहरा देखकर कोई अनुमान नहीं लगा सका कि इसी के चलते अस्पताल में काम करने वाली अरुणा की जान चली गई थी।
जेल की सजा काटने का जिक्र भी उसने किसी से नहीं किया था। अक्सर वह सफाई करने वाले साथियों से कहता था कि वह बेहद गरीब है। अपने परिवार के बारे में भी उसने कोई खास जानकारी नहीं दी थी।
ऐसे खुला सोहनलाल का राज
एनटीपीसी दादरी के पीआरओ पंकज सक्सेना ने बताया कि जैसे ही यह खुलासा हुआ कि अरुणा शानबाग का गुनहगार सोहनलाल दादरी एनटीपीसी में कॉन्ट्रेक्ट पर सफाई कर्मचारी के रूप में काम कर रहा है, उसे तत्काल हटा दिया गया।
उसका एंट्री कार्ड भी वापस ले लिया गया है। पिछले दिनों मीडिया में इस प्रकरण में उसकी पहचान का खुलासा होने के बाद कंपनी ने दो दिन पहले उसे हटा दिया। उन्होंने बताया कि सोहनलाल कंपनी का कर्मचारी नहीं था। वह ठेकेदार के जरिये कार्य करता था।
दरअसल, सोहनलाल हापुड़ की धौलाना तहसील के पारपा गांव का रहने वाला है, जो इस प्रकरण के बाद से गांव छोड़कर अपने रिश्तेदारों के पास चला गया है।
बेहद चालाक था सोहनलाल
वह चालाक किस्म का है। उसे पता था कि जिस जगह एनटीपीसी है, वहां पर उसे कोई नहीं खोज पाएगा। क्योंकि दादरी, बुलंदशहर और गाजियाबाद के बीच एनटीपीसी प्लांट में हजारों लोग काम करते हैं। शहर के दूर भी है।
ठेकेदार ने जब उसे नौकरी दी थी तो ज्यादा छानबीन भी नहीं की गई। उसका कोई सत्यापन भी नहीं कराया गया। वह अपने साथियों से बात तो करता था लेकिन परिवार के बारे में उसने किसी को नहीं बताया।
हालांकि, जब मुंबई में अस्पताल में भर्ती अरुणा की मौत हो गई, तब जाकर उसका भांडा फूट गया। बताते हैं कि अगर वह एनटीपीसी से न जाता तो लोगों के गुस्से का शिकार हो सकता था।