हाईकोर्ट ने पूर्व एयर होस्टेस के आत्महत्या मामले में आरोपी अरुणा चड्ढा की सशर्त जमानत मंजूर कर दी है। उसे जेल में करीब डेढ़ वर्ष रहने के बाद जमानत मिली है।
अरुणा की जमानत से इसी मामले में जेल में बंद हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल कांडा के जमानत का भी रास्ता साफ हो सकता है।
न्यायमूर्ति वीपी वैश ने अरुणा को एक लाख रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और दो अन्य जमानती पेश करने की शर्त पर जमानत दी है। अदालत ने बिना इजाजत उनके देश से बाहर जाने पर रोक भी लगा दी है।
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साथ ही गवाहों से संपर्क और साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने का निर्देश दिया है। इससे पूर्व अरुणा के अधिवक्ता कपिल सांकला और मेघना सांकला ने अदालत को बताया कि उनकी मुवक्किल को फर्जी मामलें में फंसाया गया है।
पुलिस ने उनके मुवक्किला के खिलाफ मात्र आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया था लेकिन ट्रायल कोर्ट ने यौन उत्पीड़न के लिए उकसाने के आरोप में अभियोग तय कर दिया था, जिसे हाईकोर्ट ने गलत ठहराते हुए खारिज कर दिया था।
उनकी मुवक्किल पिछले पांच सौ से भी ज्यादा दिनों से जेल में है। अरुणा की छोटी बच्ची है जिसकी देखभाल के लिए कोई नहीं है।
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अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि अरुणा पर गंभीर आरोप हैं, लिहाजा उन्हें जमानत न दी जाए। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि मामले में आरोपपत्र दायर हो चुका है।गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।
अदालत ने कहा कि याची काफी अरसे से जेल में है और उसे अनिश्चितकालीन अवधि के लिए जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है।