संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम।
एनसीटीई मान्यता को लेकर लंबे समय से चल रही असमंजस की स्थिति से परेशान स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज इन टीचर एजुकेशन (सियास्ते) के बीए-बीएससी के विद्यार्थियों का गुस्सा सोमवार को आखिरकार फूट ही पड़ा। विद्यार्थियों ने अपनी मांग को लेकर एससीईआरटी के बाहर करीब दो घंटे तक जाम लगा दिया। इसके चलते राजीव चौक, सोहना हाईवे और एनएच-48 प्रभावित रहा और आवाजाही करने वाले लोगों को भी परेशानी हुई। इसके बाद विद्यार्थियों अपनी मांगों को लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे और अतिरिक्त उपायुक्त सोनू भट्ट को ज्ञापन सौंपा। विद्यार्थियों के अनुसार सियास्ते गुरुग्राम में चार वर्षीय बीए बीएड पाठ्यक्रम में उन्होंने दाखिला लिया था। अब एनसीटीई की मान्यता न होने के कारण विद्यार्थी परेशान हैं। विद्यार्थियों ने कहा कि उन्होंने सरकारी संस्थान पर भरोसा करके दाखिला लिया था, उन्होंने चार साल पढ़ाई की है लेकिन अब क्या होगा, इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी है। इस समस्या के चलते करीब 800 विद्यार्थियों का भविष्य संकट में है। उनका कहना है कि लंबे समय से समाधान का इंतजार कर रहे हैं, कई अधिकारियों के सामने मांग रखी गई है लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। इस कारण हम इस तरह का रोष जताने को मजबूर हुए हैं।
सरकारी संस्थान पर भरोसा करके चार साल के पाठ्यक्रम में दाखिला लिया था। अब मान्यता को लेकर स्थिति साफ नहीं है जिसकी वजह से भविष्य को लेकर चिंता हो रही है।
दृष्टि जोशी, बीएससी बीएड गुरुग्राम।
मैं गाजियाबाद में रहता हूं। मैंने बीएससी बीएड में दाखिला लिया था और अभी थर्ड ईयर में हूं। दो साल की पढ़ाई पूरी करने के बाद पता चला कि मान्यता ही नहीं है। चिंता इस बात की है इसका असर आगे हमारी नौकरी पर न पड़े।
अनिकित ,बीएससी बीएड गुरुग्राम।
अब तक पूरी मेहनत से पढ़ाई की है। अब अगर डिग्री को लेकर कोई परेशानी आती है विद्यार्थियों के लिए यह बहुत चिंता की बात होगी।
प्रियंका , बीएससी बीएड गुरुग्राम।
मामला काफी समय चल रहा है। मैं 2025 में पास आउट हूं, लेकिन जो डिग्री मिली है उसकी कोई मान्यता नहीं है। ऐसे में हमारे भविष्य का क्या होगा यह सवाल बना हुआ है।
आयुष, बीएससी बीएड गुरुग्राम।
हमने सरकारी संस्थान समझकर यहां दाखिला लिया था अब मान्यता को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो समझ नहीं रहा आगे क्या होगा।
महक
यह मामला काफी पुराना है। 2020 में एनसीटी को सरकार ने आवेदन किया था और बीच में कोरोना आ गया। जिसके बाद हमने एनसीटीई व शिक्षा मंत्रालय को पत्र भी भेजा लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। सितंबर 2025 से यह मामला पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय में हैं
राकेश श्योरन, प्राचार्य सियासते।