केरल के मसालों से भरे जहाज विश्व व्यापार मार्ग से फिर निकलेंगे। ठीक उसी तरह जैसे करीब 3000 ईसा पूर्व चीन, मध्य पूर्व, अफ्रीका व यूरोपीय देशों में जाते थे। केरल इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। ट्रेड फेयर में केरल पवेलियन के प्रवेश द्वार पर इसकी रूपरेखा नजर आ रही है। इसमें दुनिया के मानचित्र पर उन पुराने समुद्री मार्गों का उल्लेख है, जिनसे होकर विदेशी व्यापारी केरल के समुद्र तटीय इलाकों में आकर यहां के स्थानीय व्यापारियों से उत्पाद खरीदते थे।
पवेलियन में जैविक तरीके से उपजी लौंग, इलायची, दालचीनी, काली मिर्च, कॉफी पाउडर, ग्रीन टी, शहद इत्यादि की भरमार है। जैविक मसालों की खुशबू यहां हर तरफ बिखरी है। मसाले और नारियल के उत्पाद खरीदने वाले ढूंढते हुए यहां पहुंच रहे। राज्य के स्थानीय प्रशासन ने अपने ज्यादातर मसालों का जियो टैग हासिल किया है। खास तौर से राज्य के विशेष 64 किसानों को बड़े पैमाने पर जैविक कृषि उत्पाद की जिम्मेदारी मिली है। दुनिया इन्हें जांचे, परखे, इसके लिए पवेलियन में इन उत्पादों को जगह दी है। नारियल, मसाले, केले, कटहल से बने उत्पाद की भी लंबी श्रृंखला है।
कई किसान पहली बार जैविक उत्पाद लेकर ट्रेड फेयर में आए हैं। शशि कुमार एस इलायची, लौंग, काली मिर्च, चाय, कॉफी बीन, नटमेट सीड्स, दालचीनी के साथ आए हैं। ऐसे कई किसान अपने स्टार्टअप्स लेकर आए हैं। इनका दावा है ये उत्पाद उत्कृष्ठ और सस्ते हैं। केरल सरकार के सूचना अधिकारी जय कुमार एस ने बताया कि कोवलम पोर्ट बनकर तैयार है, केरल के इस अंतरराष्ट्रीय पोर्ट के शुरू होते ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था तेजी से ऊपर जाएगी।
मन्नार की पहाड़ियों का मिलेगा एहसास
प्रकृति के खजाने मन्नार की पहाड़ियों के बीच बसे गांवों को खूबसूरत अंदाज में पेश किया है। लोग देखते ही स्वयं को पहाड़ियों में ही महसूस कर रहे है। मन्नार की खूबसूरती का दिल्ली से ही एहसास कर पा रहे हैं। राज्य के विभिन्न व्यंजन, जिनमें पारंपरिक सूखी मछली, लोकप्रिय सूखे वट्टिया कप्पा, ठेंगा पीरा अपने स्वाद से आगंतुकों को लुभा रहे हैं। बांस के भित्तिचित्र, लैंप शेड्स, मसालों के लिए बक्से भी खास हैं। पीतल के उत्पाद पर किए शिल्प कौशल देखते बनते हैं।