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Delhi NCR News: एमबी रोड से अब बिना किसी अवरोध के निकल सकेंगे सेना के जवान

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- खानपुर में उत्तरी और दक्षिणी आर्मी कैंप को जोड़ने के लिए बनेगा अंडरपास, 31.06 करोड़ रुपये होंगे खर्च
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। महरौली-बदरपुर (एमबी) रोड पर अब सेना के जवानों और सैन्य वाहनों की आवाजाही के लिए मुख्य सड़क को बार-बार रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) खानपुर स्थित 274 आर्मी ट्रांजिट कैंप के उत्तरी और दक्षिणी हिस्से को जोड़ने के लिए भूमिगत अंडरपास बनाएगा। करीब 31.06 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस अंडरपास का निर्माण 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तैयार होने के बाद सेना के जवान, वाहन और सैन्य साजो-सामान एक कैंप से दूसरे कैंप तक एमबी रोड के ऊपर से गुजरे भूमिगत रास्ते से जा सकेंगे।

खानपुर में 274 आर्मी ट्रांजिट कैंप एमबी रोड के दोनों ओर स्थित है। कैंप का एक हिस्सा सड़क के उत्तरी और दूसरा हिस्सा दक्षिणी तरफ है। ऐसे में वर्तमान व्यवस्था में सेना के जवानों और सैन्य वाहनों को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाने के लिए व्यस्त एमबी रोड को पार करना पड़ता है। यह स्थिति सुरक्षा के लिहाज से चुनौतीपूर्ण है। सेना के काफिले को सुरक्षित तरीके से सड़क पार कराने के लिए कई बार एमबी रोड पर यातायात रोकना या धीमा करना पड़ता है। इससे सड़क पर वाहनों की कतार लग जाती है। अंडरपास बनने के बाद इस समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा। सेना के दोनों कैंप सीधे भूमिगत रास्ते से जुड़ जाएंगे और जवानों तथा सैन्य वाहनों को मुख्य सड़क पर आने की जरूरत नहीं होगी। इस परियोजना का फायदा केवल सेना को ही नहीं, बल्कि एमबी रोड से गुजरने वाले आम वाहन चालकों को भी मिलेगा। साकेत, पुष्प विहार, तुगलकाबाद और बदरपुर की ओर आने-जाने वाले वाहन चालकों के लिए एमबी रोड बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। अंडरपास शुरू होने के बाद सैन्य वाहनों की आवाजाही सड़क के नीचे से होगी। इससे मुख्य सड़क पर यातायात को रोकने की जरूरत कम होगी और वाहनों की आवाजाही अधिक सुचारू रह सकेगी।
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80 मीटर होगी मुख्य सुरंग

प्रस्तावित अंडरपास की भूमिगत मुख्य सुरंग करीब 80 मीटर लंबी होगी। दोनों ओर वाहनों को अंडरपास में उतारने और बाहर निकालने के लिए रैंप बनाए जाएंगे। इन रैंप की कुल लंबाई करीब 380 मीटर होगी। अंडरपास को सैन्य वाहनों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जा रहा है, ताकि काफिले को सुरक्षित और सुचारू रास्ता मिल सके। इसके निर्माण को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि संरचना की डिजाइन लाइफ कम से कम 100 वर्ष रहे।
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