अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (दिल्ली चिड़ियाघर) में रविवार को दूसरी संडे स्पाइडर एंड इंसेक्ट वॉक और दसवीं संडे बर्ड वॉक का आयोजन किया गया। सुबह 7 से 10 बजे तक हुई इस नेचर वॉक में 29 लोगों ने हिस्सा लिया। इसमें प्रकृति प्रेमी, छात्र, वन्यजीव फोटोग्राफर, शोधकर्ता, इंटर्न और स्वयंसेवक शामिल रहे। स्पाइडर और इंसेक्ट वॉक का नेतृत्व प्रकृतिवादी और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर अशीर कुमार ने किया, जबकि बर्ड वॉक की अगुवाई पक्षी विशेषज्ञ डॉ. परवेज खान ने की।
इस दौरान प्रतिभागियों ने 44 प्रजातियों के पक्षियों, 8 प्रजातियों की मकड़ियों और 16 तरह के कीड़ों की पहचान और रिकॉर्डिंग की। इस दौरान 1,500 से अधिक पक्षियों, मकड़ियों और कीड़ों को देखा गया। प्रतिभागियों को प्रजातियों की पहचान, उनके व्यवहार को समझने और जैव विविधता से जुड़े आंकड़े दर्ज करने की जानकारी भी दी गई। वॉक के दौरान 80 से अधिक पेंटेड स्टॉर्क भी नजर आए। यह पक्षी पिछले सप्ताह राष्ट्रीय प्राणी उद्यान पहुंचे थे और तालाब के आसपास पेड़ों पर घोंसले बनाना शुरू कर चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन पक्षियों का यहां आकर घोंसला बनाना चिड़ियाघर के वेटलैंड और पेड़ों वाले क्षेत्रों के लिए अच्छे पर्यावरणीय संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
मकड़ियों और कीड़ों को भी देखा
प्रतिभागियों ने कई तरह की मकड़ियों और कीड़ों को भी देखा। इनमें ऑर्ब-वीवर, जंपिंग स्पाइडर, वुल्फ स्पाइडर और लिंक्स स्पाइडर जैसी मकड़ियां शामिल थीं। वहीं लेडीबर्ड बीटल, ड्रैगनफ्लाई, डैम्सलफ्लाई, चींटी, बी, तितली, पेपर वास्प और कैटीडिड जैसे कई कीड़े भी रिकॉर्ड किए गए। कार्यक्रम के दौरान अशीर कुमार ने बताया कि मकड़ियां और कीड़े पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी हैं। वे कीटों की संख्या नियंत्रित करने, परागण और जैविक पदार्थों को तोड़ने जैसे महत्वपूर्ण काम करते हैं। इनके बिना पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन प्रभावित हो सकता है।