दिल्ली विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए नाक का सवाल बन गया है। केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति दिल्ली फतह की है, लेकिन माहौल ऐसा बन गया है कि पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने अपने-अपने नंबर बढ़ाने में मदद मिल रही है।
केंद्र का हर नेता एक दूसरे से आगे बढ़ने में दिखाई पड़ रहा है। वहीं, केंद्रीय नेतृत्व के सामने प्रदेश के कार्यकर्ता दरकिनार हो रहे हैं। दिल्ली चुनाव में जिस तरह से केंद्रीय नेतृत्व सक्रिय हुआ है, ऐसा पिछले पांच चुनावों में कभी देखने को नहीं मिला।
पहली बार केंद्रीय मंत्री अपने मंत्रालय के विकास कार्यों को बताते नहीं थक रहे। आठ महीने की सरकार का डंका ज्यादा पीटा जा रहा है और दिल्ली के लिए घोषणा पत्र निकालने में पीछे हट रहे हैं।