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राजधानी में दौड़ेंगी ऐप आधारित प्रीमियम बसें, सीसीटीवी, जीपीएस और फ्री वाई-फाई

Sat, 23 Apr 2016 02:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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गोपाल राय
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दिल्ली में ओला-उबर की तर्ज पर ऐप आधारिक प्रीमियम बसें उतारने के लिए दिल्ली कैबिनेट ने बृहस्पतिवार को नई पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। प्रीमियम बस सर्विस में आने वाले आईटी आधारित एग्रीगेटर (कंपनी) को कम से कम 50 बसें अटैच करनी होंगी।
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एसी बस में सीसीटीवी, जीपीएस, फ्री वाई-फाई की अनिवार्यता वाली बस की बुकिंग व किराया भुगतान ऑनलाइन होगा। स्टेज कैरिज व कांट्रैक्ट कैरिज की बसें शामिल हो सकेंगी। कंपनी का रजिस्ट्रेशन एक जून से शुरू होगा। परिवहन मंत्री गोपाल राय ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि ब्लू लाइन बस की तरह सवारी उठाने की प्रतियोगिता प्रीमियम बस में नहीं होगी। जो ऑनलाइन बुकिंग कर चुके होंगे, उन्हीं सवारी को बैठाया जाएगा।

हाईफाई बस का किराया परिचालन कंपनी खुद मार्केट के हिसाब से तय करेगी। लेकिन बुकिंग के बाद अगर ब्रेक डाउन या हादसे के कारण बुक ट्रिप मिस करता है तो वैकल्पिक बस की व्यवस्था करनी होगी या फिर दोगुना किराया बतौर जुर्माना चुकाना होगा। कम सवारी मिलने पर ट्रिप कैंसल की तो किराए का 10 गुना भुगतान कंपनी यात्री को करेगी।
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ट्रिप शुरू होने के पांच मिनट पहले बुकिंग बंद हो जाएगी

गोपाल राय - फोटो : ani
महिला सुरक्षा के लिए ऐप में पैनिक बटन जरूरी होगा। ट्रिप शुरू होने के पांच मिनट पहले बुकिंग बंद हो जाएगी, जिनका नाम उस सूची में होगा, वही सफर कर सकेंगे। अगर अनधिकृत यात्री बस में बैठाता है तो पहली बार में 2500 रुपये, दूसरी बार में 5000 रुपये जुर्माना चुकाना होगा।

परिवहन मंत्री ने बताया बस में तैनात हर स्टाफ और यात्रियों की सूची वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। सुरक्षा राशि के तौर पर कंपनी को 100 बस तक के लिए 25 लाख, 200 बस तक के लिए 50 लाख और 500 से अधिक बसों के लिए एक करोड़ रुपये सरकार के पास जमा करानी होगी।

प्रीमियम बस सर्विस के नाम पर मनमानी करने के सवाल पर गोपाल राय ने कहा है कि ऐसी स्थिति बनती है तो अधिकतम किराया सरकार तय कर देगी। रूट कंपनी खुद तैयार करेगी लेकिन सरकार के पास जानकारी देगी।
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प्रीमियम बस सर्विस में ये है खास

बस - फोटो : file photo
. बुकिंग, किराया भुगतान समेत इससे जुड़ी सभी सेवाएं आईटी आधारित होंगी।
. किराया व रूट तय करने का अधिकार संबंधित कंपनी के पास होगा।
. एक कंपनी अपने साथ 50 बसें अलग-अलग परमिट होल्डर की जोड़ सकेंगी।
. सुरक्षा कारणों से बस में लगे सीसीटीवी कैमरे का रिकार्ड 30 दिन तक रखना अनिवार्य होगा।
. ट्रिप शुरू होने के पांच मिनट पहले बुकिंग बंद हो जाएगी, जिनका नाम उस सूची में होगा, वही सफर कर सकेंगे।
. कांट्रैक्ट कैरिज के अलावा स्टेज कैरिज की बसें भी अटैच हो सकेंगी।
. बुकिंग के बाद अगर ब्रेक डाउन या हादसे के कारण बुक ट्रिप मिस करता है तो वैकल्पिक बस की व्यवस्था करनी होगी या फिर दोगुना किराया बतौर जुर्माना चुकाना होगा।
. कम सवारी मिलने के कारण ट्रिप कैंसल करने पर किराए का 10 गुना भुगतान कंपनी यात्री को करेगी।
. कंपनी का रजिस्ट्रेशन एक जून से शुरू होगा, 30 दिन में बसों का सत्यापन कराना होगा।
. शिकायतों के निपटारे के लिए सिस्टम बनेगा।
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