मैक्स के बाद अब अपोलो अस्पताल में भी प्लाज्मा तकनीक के जरिये मरीज वेंटिलेटर से बाहर आ चुका है। हालांकि अभी तक लोकनायक अस्पताल से इस तकनीक के सफल परिणाम सामने नहीं आए हैं। दिल्ली के तीन अस्पतालों में अभी प्लाज्मा ट्रायल चल रहा है जबकि एम्स ने झज्जर स्थित अपने कैंपस में भी कुछ मरीजों को प्लाज्मा देना शुरू कर दिया है।
जानकारी के अनुसार अपोलो अस्पताल में भर्ती 42 वर्षीय संक्रमित मरीज को प्लाज्मा थैरेपी के जरिये अब वेंटिलेटर से बाहर कर दिया है। उसे आईसीयू से कोविड वार्ड में शिफ्ट किया है। डॉक्टरों के अनुसार मरीज की हालत पहले से काफी ठीक है।
मधुमेह होने के चलते मरीज को जब संक्रमण हुआ तो उसको काफी दिक्कतें आ रही थीं। सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। लेकिन जब प्लाज्मा दिया गया तो तीन दिन बाद उसकी स्थिति में काफी सुधार देखा गया।
पहला मरीज घर लौटा, जारी रहेगा परीक्षण
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि एलएनजेपी अस्पताल में केंद्र सरकार ने प्लाज्मा थेरेपी का परीक्षण करने की अनुमति दी थी। कुछ मरीजों को प्लाज्मा दिया और उनमें से पहला मरीज ठीक होकर अपने घर चला गया है। पहले वह काफी गंभीर था और आईसीयू में था। अब वह बिल्कुल ठीक है। प्लाज्मा थेरेपी के प्राथमिक नतीजे अच्छे मिल रहे हैं।
केजरीवाल के मुताबिक, अभी कुछ दिन पहले केंद्र सरकार की तरफ से कुछ बयान आए थे, जिनकी वजह से असमंजस की स्थिति पैदा हुई थी। कई लोगों के फोन आए कि क्या प्लाज्मा थेरेपी को बंद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने सिर्फ इतना कहा था कि जिन लोगों के लिए केंद्र सरकार से अनुमति है, केवल उन्हीं पर प्लाज्मा थेरेपी का ट्रायल करें।
प्लाज्मा थेरेपी के अभी नतीजे अंतिम नहीं आए हैं। अभी उसका परीक्षण चल रहा है। यही केंद्र सरकार ने कहा था और दिल्ली सरकार भी यही कह रही है। अभी हम लोग एलएनजेपी अस्पताल में जो गंभीर मरीज हैं, उन पर परीक्षण करके देख रहे हैं कि कैसे नतीजे आते हैं। केजरीवाल ने माना कि शुरुआती नतीजे अच्छे आए हैं। अभी तक जो 1100 लोग ठीक हो गए हैं, सरकार ने उनसे संपर्क किया है। सभी लोग अपना प्लाज्मा डोनेट करने के लिए तैयार हैं।