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'केवल 100 रुपए में जेएनयू में किया जा सकता है कार्यक्रम'

Tue, 01 Mar 2016 05:45 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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जेएनयू में अफजल गुरु की फांसी के विरोध में कार्यकआम आयोजित करने के चलते देशद्रोह के आरोपों का सामना कर रहे छात्रों ने उन्हें मिलने वाली किसी भी विदेशी वित्त सहायता की बात को गलत बताया।
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आरोपी छात्रों के मुताबिक जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में किसी भी कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए केवल 100 रुपए ही लगते हैं। जेएनयू छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष अनंत प्रकाश नारायण के मुताबिक उनके ‘आतंकियों से रिश्तों’ की जांच के लिए कई कहानियां बनाई जा रही हैं और आरोप लगाए जा रहे हैं कि उन्हें विदेशों से वित्तपोषण प्राप्त हुआ।

नारायण ने कहा कि जिन्हें जेएनयू की संस्कृति के बारे में पता है, वे यह अच्छी तरह जानते हैं कि यहां 100 रुपए खर्च करने पर ही कोई भी कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है। इतना ही नहीं इसके लिए किसी खास तैयारी की जरूरत भी नहीं होती। जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष आशुतोष कुमार ने कहा कि उनका नाम कोर्ट और समाचार चैनलों की बहस में घसीटा जा रहा है। उनके बारे में संसद में भी चिल्ला-चिल्ला कर बताया जा रहा है।
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पूरा देश उन्हें आतंकवादियों की तरह देख रहा है। लेकिन क्या कोई जानता कि जेएनयू में काम कैसे होता है और ऐसे मामलों से वहां कैसे निपटा जाता है।
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छात्रों ने दिया जेएनयू कल्चर का हवाला

आशुतोष कुमार के मुताबिक अफजल गुरु पर बहस के लिए उन्हें किसी आतंकी समूह से वित्त पोषण की जरूरत नहीं है। वे आगे पूछते हैं कि क्या किसी विश्वविद्यालय को इसकी जरूरत है?

वे छात्र हैं, उनकी सिर्फ बहस करने, सवाल पूछने और अभिव्यक्त करने की इच्छा होती है। जिस तरह से सरकार और पुलिस बातों को फैला रही है, यह देश में असहिष्णुता होने का उदाहरण है। बता दें कि अनंत और आशुतोष दोनों विश्वविद्यालय में पीएचडी के छात्र हैं। वे उन छह छात्रों में से हैं जिन्हें पुलिस ने नौ फरवरी के एक कार्यक्रम में कथित तौर पर राष्ट्र-विरोधी नारे लगाने में उनकी कथित भूमिका के लिए चिह्नित किया है।

छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को जहां 12 फरवरी को गिरफ्तार कर लिया गया था, वहीं ये दोनों छात्र अन्य तीन छात्रों उमर खालिद, अनिर्बन भट्टाचार्य और राम नागा के साथ भूमिगत हो गए थे क्योंकि उन्हें ‘‘भीड़ द्वारा पीटे जाने’’ का डर था। घटना के लगभग 10 दिन बाद वे सभी कैंपस वापस आए और बाद में उमर और अनिर्बन ने पुलिस के समक्ष सरेंडर किया। बाकी तीनों ने ऐसा करने के मना कर दिया लेकिन कहा कि पुलिस को जब जरूरत होगी, वे तब पूछताछ में सहयोग करेंगे।

ये तीनों अब छात्रसंघ की उपाध्यक्ष शहला राशिद शोरा के साथ विश्वविद्यालय को कथित तौर पर ‘राष्ट्र-विरोधी’ के तौर पर प्रचारित किए जाने के विरोध में आंदोलन चला रहे हैं।
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