8 गनों का बेड़ा करेगा 40 किमी सड़कों पर पानी का छिड़काव, 30 मीटर तक पहुंचेगी बारीक फुहार
जीपीएस से लाइव निगरानी, गाड़ी खड़ी मिली तो 3,000 रुपये प्रति घंटे लगेगा जुर्माना
आदित्य पाण्डेय
नई दिल्ली। दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों में धूल और प्रदूषण पर काबू पाने के लिए साल के 10 महीने एंटी-स्मॉग गन चलेगी। दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) ने करीब 1.96 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की है। इसके तहत सर्दियों के दौरान धूल और प्रदूषण के कणों पर काबू पाने के लिए तड़के 3 बजे से एंटी-स्मॉग गन सड़कों पर उतार दी जाएगी। सड़कों पर मशीनरी तैनात करने के लिए निविदा प्रक्रिया चालू है। इसके पूरा होने के बाद अगले महीने से अभियान शुरू करने की तैयारी है।
परियोजना के तहत आठ एंटी-स्मॉग गन वाले ट्रक तैनात किए जाएंगे। इनमें छह नियमित और दो रिजर्व वाहन होंगे। प्रत्येक वाहन में 7000 लीटर क्षमता का टैंक होगा। एक मशीन आठ घंटे की ड्यूटी में कम से कम 40 किलोमीटर सड़क पर पानी का छिड़काव कर सकेगी। इससे औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क की धूल को उड़ने से रोकने में मदद मिलेगी। एंटी-स्मॉग गन से निकलने वाली पानी की फुहार 30 मीटर तक पहुंचेगी। मशीन 10 से 30 माइक्रोन तक की बेहद बारीक बूंदों का छिड़काव करेगी। गन 330 डिग्री क्षैतिज और 60 डिग्री ऊर्ध्वाधर दिशा में घूम सकेगी। प्रत्येक मशीन में 24 स्टेनलेस स्टील नोजल लगाए जाएंगे, जिससे बड़े क्षेत्र में एक साथ छिड़काव किया जा सकेगा।
सुबह तड़के और दोपहर में चलेगा अभियान
एंटी-स्मॉग गन से छिड़काव दो शिफ्ट में किया जाएगा। पहली शिफ्ट सुबह तीन से सात बजे तक होगी। दूसरी शिफ्ट दोपहर में चार घंटे चलेगी। इस दौरान गैर-व्यस्त समय में औद्योगिक क्षेत्रों की सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जाएगा। बरसात के दो महीनों को छोड़कर यह व्यवस्था साल के 10 महीने लागू रहेगी।
जीपीएस से होगी हर ट्रक की निगरानी
जिम्मेदार एजेंसी को अभियान में लगाए जाने वाले सभी ट्रकों में जीपीएस अनिवार्य रूप से लगाना होगा। अधिकारियों को वाहनों की लाइव लोकेशन देखने की सुविधा होगी। ड्यूटी के दौरान कोई वाहन खड़ा मिला तो संबंधित एजेंसी पर 3,000 रुपये प्रति घंटे का जुर्माना लगाया जाएगा। जरूरत के मुताबिक वाहन उपलब्ध नहीं कराने पर 15,000 रुपये प्रतिदिन की कटौती होगी। टैंकर पूरा भरा नहीं होने पर 2,000 रुपये प्रतिदिन और जीपीएस रिपोर्ट नहीं देने पर 500 रुपये प्रतिदिन की कटौती का प्रावधान है।
पीने के पानी से नहीं होगा छिड़काव
पीने के पानी की बर्बादी रोकने के लिए छिड़काव में केवल एसटीपी या सीईटीपी के शोधित (ट्रीटेड) पानी का प्रयोग होगा। पीने के पानी से सड़क पर छिड़काव नहीं किया जाएगा। इससे एक तरफ धूल नियंत्रण अभियान चलेगा, वहीं पानी के इस्तेमाल को लेकर भी निगरानी रखी जाएगी।