सज्जन कुमार के वकील ने कहा कि इस समय चल रहे मुकदमे में उच्च न्यायालय ने उनके मुवक्किल को अग्रिम जमानत दी थी और शीर्ष अदालत ने इसकी पुष्टि की थी।
इस पर पीठ ने कहा, ‘‘इस पर विस्तार से सुनवाई की आवश्यकता है।’’ कुमार के वकील ने जब यह कहा कि जमानत याचिका की सुनवाई में अधिक समय नहीं लगेगा तो मेहता ने कहा, ‘‘अपराध की गंभीरता को देखिये। यह नरसंहार था।’’
इसके बाद पीठ ने कहा कि वह जमानत याचिका पर अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई करेगी। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इससे पहले आठ अप्रैल को सज्जन कुमार की जमानत याचिका का विरोध करते हुये दावा किया था कि 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान दिल्ली में हुये जघन्य अपराध के वह ‘‘सरगना’’ थे जिसमे सिखों का नरसंहार किया गया था।
तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की 31 अक्टूबर, 1984 को उनके ही दो सिख अंगरक्षकों द्वारा गोली मार कर हत्या किये जाने के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा और अग्निकांड की घटनायें हुयी थी जिसमें बड़ी संख्या में सिखों की हत्या कर दी गयी थी।
इनपुटः भाषा