अंसल बंधुओं को बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। कोर्ट ने उपहार हादसा पीड़ितों द्वारा दायर क्यूरेटिव याचिका को खारिज कर दिया। इस निर्णय से अंसल बंधु फिर से जेल जाने से बच गए हैं। 1997 में हुए उपहार सिनेमा अग्निकांड में 59 लोगों की जान गई थी। यह सिनेमा हाल अंसल बंधुओं का था।
चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमना आर जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ ने उपहार हादसा पीड़ित एसोसिएशन द्वारा दायर क्यूरेटिव याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में अंसल बंधुओं की सजा बढ़ाने की अपील की गई थी।
पीठ ने कहा कि याचिका में कोई मेरिट नहीं है। साथ ही पीठ ने याचिका पर ओपन कोर्ट में सुनवाई की मांग को भी ठुकरा दिया। क्यूरेटिव याचिका आखिरी कानूनी विकल्प होता है। इस पर विचार आमतौर पर चैंबर में किया जाता है, बशर्ते कि कोर्ट ओपन कोर्ट में सुनवाई का निर्णय न ले।
एसोसिएशन की अध्यक्ष नीलम कृष्णमूर्ति ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निराशा जताई है। उनका कहना है कि हमें मुआवजा नहीं चाहिए बल्कि हमने दोषी अंसल बंधुओं की सजा बढ़ाने की मांग की थी जिससे दोबारा ऐसी घटनाएं न हों लेकिन कोर्ट ने ऐसा नहीं किया।
साथ ही उन्होंने कहा कि क्यूरेटिव याचिका पर ओपन कोर्ट में सुनवाई की मांग की गई थी, कोर्ट ने उसे भी ठुकरा दिया। पीड़ितों ने सुप्रीम कोर्ट के 2016 के उस आदेश पर क्यूरेटिव याचिका दाखिल की थी जिसमें पुनर्विचार याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई के बाद सुशील अंसल की उम्र और बीमारी के चलते जेल की सजा को माफ कर दिया था जबकि गोपाल अंसल की एक साल की सजा को बरकरार रखा था।
नवंबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गोपाल और सुशील अंसल को तीन महीने के भीतर 30-30 करोड़ रुपये का जुर्माना अदा करने का निर्देश दिया गया था। तीन सदस्यीय पीठ ने उम्र के आधार पर कहा था कि जुर्माना न देने की सूरत में 2 साल जेल की सजा दी जाएगी। सुशील अंसल पांच महीने जबकि गोपाल अंसल चार महीने की सजा काट चुके थे।