दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सरकार के दौरान जल बोर्ड में 400 करोड़ रुपये के वाटर टैंकर घोटाले ने सियासी गलियारे में हलचल बढ़ा दी है। घोटाले में शीला दीक्षित के साथ मौजूदा केजरीवाल सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के अलावा आपराधिक साजिश रचने व अमानत में खयानत (आईपीसी 409 एंड 120बी) की धाराएं लगाई गई है।
एसीबी ने केजरीवाल सरकार पर घोटाले की जांच रिपोर्ट को 11 महीने तक दबाकर रखने के चलते यह मुकदमा दर्ज किया है। इससे केजरीवाल सरकार की मुसीबत बढ़ सकती है।
एसीबी एफआईआर के मुताबिक तत्कालीन सरकार ने सभी नियमों को ताख पर रखकर हैदराबाद की एक निजी कंपनी को वाटर टैंकर का टेंडर दिया था।
एफआईआर में पांच अधिकारियों का जिक्र
- फोटो : अमर उजाला
खास बात यह है की कंपनी के जीएम प्रोजेक्ट भूदेव चक्रवती ने इसे पाने के लिए ईमेल से टेंडर फाइल किया और खुद को एक सरकारी कंपनी बताई थी। एसीबी की मानें तो इस पूरे घोटाले में कई नेता और अधिकारी शामिल हो सकते हैं।
फिलहाल एफआईआर में पांच अधिकारियों का जिक्र है। एसीबी सूत्रों के मुताबिक घोटाले में जिसकी भी भूमिका संदेह के दायरे में होगी उसे जांच में शामिल किया जाएगा।
मंगलवार को एसीबी चीफ मुकेश कुमार मीणा ने एफआईआर संबंधी रिपोर्ट गृहमंत्रालय, उप राज्यपाल व पुलिस आयुक्त आलोक कुमार वर्मा को दे दी है।
24 पन्ने की एफआईआर
केजरीवाल
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मीणा ने कहा कि टैंकर घोटाले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच बिना किसी भेदभाव से की जाएगी। मामले में कितने आरोपी होंगे इसपर मीणा ने कहा कि अभी प्राथमिक स्तर पर जांच चल रही है।
जिसके आधार पर आरोपियों की सूची तैयार होगी। उसके बाद नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। इसमें शीला दीक्षित समेत जल बोर्ड अधिकारी और 11 महीने तक घोटाले की जांच रिपोर्ट रोककर रखने पर अरविंद केजरीवाल को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
एसीबी ने कुल 24 पन्ने की एफआईआर दर्ज की है। इसमें आरोपी के तौर पर किसी का नाम नहीं है लेकिन दिल्ली सरकार का जिक्र जरूर है। जिन शिकायतों पर एफआईआर की गई है उनमें केजरीवाल व शीला दीक्षित समेत दिल्ली जल बोर्ड के पांच अधिकारियों के नाम शामिल है।