प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा योग को अंतरराष्ट्रीय फलक तक पहुंचाने के साथ ही इसके कारोबार में भी वृद्धि होने लगी है। बीते एक वर्ष में केवल एनसीआर में इसका कारोबार 250 करोड़ के पार पहुंच गया है।
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इसमें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा योगदान हैं। ट्रेनरों की मांग में बीते एक वर्ष में 40 फीसदी और योग करने वालों में 35 फीसदी तक इजाफा हुआ है। योग को लेकर सबसे अधिक क्रेज मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करने वाले लोगों के बीच बढ़ा है। कंपनियों में अपनी कर्मचारियों की कार्यकुशलता और कारोबार बढ़ाने के लिए प्रोफेशनल ट्रेनर रखे जा रहे हैं।
कंपनियों का मानना है कि इससे कर्मचारियों में कार्यक्षमता में बढ़ोतरी हुई है। इससे उत्पादकता पर सकारात्मक असर हुआ है। इसके लिए बीते एक वर्ष में हर कंपनी ने औसतन चार योग प्रशिक्षण शिविर लगाए हैं। इसके अलावा कई नामचीन कंपनियों में सुबह और शाम की शिफ्ट वाले कर्मचारियों के लिए बाकायदा योग ट्रेनर नियुक्त किए गए हैं।
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एसोचैम के आंकड़ों के मुताबिक बीते एक वर्ष में योग का सबसे अधिक क्रेज ए प्लस केटेगरी के शहर में है। उत्तरी भारत में सबसे बड़ा योगदान एनसीआर का है, जिसमें गुड़गांव व नोएडा अव्वल स्थान पर हैं। इसके पीछे कॉरपोरेट की बदली सोच है। एसोचैम के राष्ट्रीय सचिव डीएस रावत ने कहा कि कंपनियों में बढ़ते क्रेज के कारण योग अब सस्ता नहीं रहा।
समय के हिसाब से चार्ज लगता है। अध्यात्म में कॉरपोरेट कल्चर आने और जरूरत व लोकप्रियता की वजह से योग अब महंगा होता जा रहा है। कमाई का बड़ा साधन बनता जा रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अर्बन क्लैप के संस्थापक व सीईओ अभिराज बहल का कहना है कि 2014 में योग के भविष्य को देखते हुए इसी सेवा के साथ प्लेटफार्म शुरू किया था।
अभी दिल्ली-एनसीआर में 2000 से अधिक योग ट्रेनर जुड़े हुए हैं, जिनके पास रोजाना कम से कम चार कॉल होते हैं। बेसिक, अनुभवी और प्रोफेशनल अलग-अलग जरूरत के हिसाब से पैकेज दिया जाता है।
योग से जुड़े उत्पादों का भी बढ़ा कारोबार
ट्रेनरों के अलावा योग के दौरान पहने जाने वाले कपड़ों का बाजार ही करोड़ों के पार पहुंच चुका है। कई नई कंपनियां योग से जुड़े कपड़े बनाने के मैदान में उतर आई हैं।
एसोचैम की मानें तो अगले एक से दो साल में इसके दोगुना होने के आसार हैं। योग की ट्रेनिंग से लेकर उससे जुड़े प्रोजेक्ट तक का बिजनेस अन्य बिजनेस की अपेक्षा ज्यादा रफ्तार से बढ़ रहा है। इसमें चटाई से लेकर जूते, सीडी, डीवीडी, बैंड, एसेसरीज, स्टूडियोज की भी डिमांड बढ़ी है।
ई-कॉमर्स कंपनियां स्पेशल योग थीम स्टोर ले आई हैं। वे स्पेशल ऑफर्स दे रही हैं। स्नैपडील के प्रवक्ता का कहना है कि ऑनलाइन स्टोर पर एक साल में योग के लिए उपयोग में लाए जाने वाले मैट की मांग में 80 फीसदी और ड्रेस में 40 से 50 फीसदी तक का इजाफा हुआ है।
एसोचैम के हेल्थ कमेटी काउंसिल के चेयरमैन डॉ. बीके राव का कहना है कि बीमारियों की डर से लोग योग की तरफ बढ़ रहे हैं। हाल ही में एसोचैम की रिपोर्ट में बताया गया था कि 250 मल्टीनेशनल कंपनियों के 1500 कॉरपोरेट कर्मचारियों पर किए सर्वे में पाया गया कि 45.5 फीसदी लोग डिप्रेशन, 23 फीसदी मोटापा, 9 फीसदी हाई ब्लड प्रेशर और 8 फीसदी लोग डायबिटीज से ग्रस्त हैं।
इसके अलावा 5.5 फीसदी स्पॉन्डलाइटिस, 4 फीसदी हृदय रोग, 3 फीसदी सर्वाइकल, 2.5 फीसदी अस्थमा, 1 फीसदी स्लिप डिस्क, 1.5 फीसदी अर्थराइटिस से ग्रस्त हैं। मल्टीनेशनल कंपनियों के करीब 40.5 फीसदी छह घंटे से कम समय सोने की वजह से अधिक तनाव महसूस करते हैं।