शहर के पावर हाउस के पास रहने वाली एक महिला अनीसा पुत्री जुहुरू ने अपने पति सिराजुद्दीन व अन्य परिजनों के खिलाफ महिला संरक्षण अधिनियम के तहत जेएमआईसी नूंह की अदालत में अपना वाद दायर किया था।
अदालत ने उसके पक्ष में अपना फैसला सुनाते हुए आदेश भी जारी कर दिया मगर उसे अब भी इंसाफ का इंतजार है। पता चला है कि उक्त अदालत ने वादी से संबंधित मामले में आदेश पत्र की प्रतिलिपियां जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी और एसएचओ नूंह को भिजवाई हुई हैं मगर वादी अभी तक परेशान है।
बता दें कि जेएमआईसी नूंह की अदालत में अनीसा बनाम सिराजुद्दीन मामले, जोकि महिला संरक्षण अधिनियम के तहत दायर किया गया था, में अहम आदेश जारी किए। इस आदेश की पालना के लिए दो अधिकारियों को आदेश व जरूरी कागजात भी भिजवाए गए।
इस मामले में अनीसा के वकील हारून खान ने कहा कि वे वादी को इंसाफ दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि माननीय अदालत ने अनीसा और उसकी एक संतान को उसके पति सिराजुद्दीन निवासी गुंडबास की ओर से तीन हजार रुपए मासिक गुजारा भत्ता और 15 सौ रुपए मकान किराया अदा करने के आदेश दिए हुए।
इसके साथ ही अदालत ने इस वादी को दूसरे पक्ष से संरक्षण भी उपलब्ध कराए जाने के नूंह पुलिस को आदेश दिए। उधर अनीसा का कहना है कि अदालत का फैसला आने के बावजूद अभी तक पारिवार का गुजर-बसर के लिए एक भी पैसा नहीं मिला और नूंह पुलिस उनकी बात पर ध्यान नहीं दे रही।
शनिवार को जब इस संबंध में जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी मधु जैन ने बताया कि अभी उनको अदालत के आदेश की प्रति नहीं मिली है। अदालत का जैसा आदेश होगा, उसकी पूर्ण रूपेण पालना कराई जाएगी।