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सरकारी तंत्र से जूझती तीन महिला अधिकारी, कब मिलेगा इंसाफ

Sat, 10 Oct 2015 05:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
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बीते सोमवार को जिला मत्स्य पालन विभाग की एक महिला अधिकारी अनीता दहिया के साथ मारपीट का मामले में अभी तक नूंह पुलिस मौन साधे हुए है।
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उधर जिला शिक्षा विभाग के रेवासन स्थित आरोही स्कूल की एक शिक्षिका डॉ. सुलक्षणा की ओर से बीईओ नूंह अनूप सिंह और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध गंभीर किस्म के आरोप लगाने के बाद दोनों मामले अब महिला उत्पीड़न में मेवात की निष्पक्ष तस्वीर को दागदार बना रहे हैं।

इस मामले पर जहां महिला थाने की डीएसपी शकुंतला ने पहले ही नूंह थाने को इस मामले की रिपोर्ट भिजवा देने की बात कही थी। उधर एसएचओ नूंह अल्लाबक््श की ओर से इस मामले में आरोपी के विरुद्ध केस दर्ज कराने के मामले में महिला पुलिस की ओर इशारा कर दिया।
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ऐसे में मेवात पुलिस के दो अधिकारी अपने बयानों की वजह से आमने सामने आ गए हैं। उधर मत्स्य विभाग की महिला अधिकारी के साथ विभाग के ईएफओ लुकमान की ओर से कथित तौर पर मारपीट के बाद केस दर्ज नहीं होना भी मेवात पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है।
 
शिक्षा विभाग में आरोही स्कूल की प्रवक्ता ने अब ईमेल के माध्यम से प्रधानमंत्री, शिक्षा मंत्री, केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री, जिला शिक्षा अधिकारी मेवात, एसपी मेवात समेत विभागीय अधिकारियों को अपनी शिकायत भेजने के बाद अब एक बार फिर मेवात के पत्रकारों को ईमेल से अपनी ओर से उच्चाधिकारियों एवं केन्द्रीय नेताओं को भेजे गए पत्रों की प्रतिलिपियां भेजकर इस मामले में सवाल उठाया है।

अहम बात यह है कि इस मामले में अब उनके पति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर परिवार की लगातार बदनामी होने की वजह से इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई है।

सवाल यह है कि पुलिस विभाग की महिला डीएसपी, शिक्षा विभाग की प्रवक्ता और मत्स्य पालन विभाग की अधिकारी के मामले में जब यह स्थिति उभरकर सामने आ रही है तो सरकारी विभागों में काम करने वाले साधारण महिला कर्मचारी के साथ कैसा सलूक होता होगा, यह मेवात प्रशासन पर सवाल उठाता है।

इस मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार शास्त्री कहते हैं कि उन्होंने शिक्षा से संबंधित मामला निदेशालय के अधिकारियों को जांच के लिए भेजा हुआ है। उनको इस मामले पर अपनी ओर से कुछ नहीं कहना।
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एसपी बी सतीश बालन सरकारी कार्यालयों में महिला कर्मचारियों के उत्पीड़न के मामलों को सुलझाने के लिए कमेटियों के गठन की बात कहते हैं।

उधर महिला डीएसपी शकुंतला की मत्स्य पालन विभाग की महिला अधिकारी के मामले में आई टिप्पणी तीनों विभागों की कार्यशैली पर सवाल उठाती हैं। सवाल है आखिर इन महिलाओं को पुरुष अधिकारियों की ओर से इंसाफ क्यों नहीं मिल रहा।

शिक्षा विभाग की प्रवक्ता का सोशल मीडिया में सारी व्यथा जाहिर करने के बाद शिक्षा मंत्री तक से उनको इंसाफ नहीं मिलना बेहद चिंतनीय विषय है।
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