सूखे के चलते नुकसान झेल रहे पशुपालकों को पराग ने एक और झटका दिया है। सहकारी क्षेत्र की दूध कंपनी पराग ने अपने खरीद दामों में कमी कर दी है।
इससे पशुपालकों को नुकसान का सामना करना होगा। प्रतिस्पर्धा के दौर में पराग को दूध की और कमी होने की आशंका भी बढ़ गई है।
पराग के जीएम बीआर अरोड़ा के अनुसार कंपनी एनसीआर में पशुपालकों से दूध खरीदकर मेरठ में थोक सप्लाई करती है। घाटे के चलते थोक में एसएमजी क्रय दरों में एक रुपये की कमी कर दी गई है।
थोक में अब दूध 40 रुपये की बजाय 39 रुपये प्रति लीटर लिया जा रहा है। ऐसे में पराग ने पशुपालकों से खरीद मूल्य में भी कमी कर दी है। अब पशुपालकों से 36 रुपये लीटर दूध खरीदेगा। अभी तक यह 38 रुपये लीटर खरीदा जा रहा था। इसका नुकसान पशुपालकों को उठाना पड़ेगा।
डा. अरोड़ा के अनुसार नवंबर माह में दूध की आवक बढ़ जाती है। नवंबर-दिसंबर में दूध देने वाले पशुओं की संख्या में इजाफा हो जाता है। इसके चलते अभी दूध के दामों में और कमी हो सकती है।
उप निदेशक कृषि प्रसार डा. जेके तोमर ने पराग की इस नीति को आत्मघाती बताया है। उनके अनुसार प्रतिस्पर्धा के दौर में पशुपालक अन्य निजी कंपनियों को दूध बेचने का निर्णय ले सकते हैं। निजी कंपनियां फुटकर दूध 40-42 रुपये लीटर खरीद रही हैं।