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ऐसा चश्मदीद, जो कभी न दे सकेगा गवाही

Tue, 07 Apr 2015 11:31 AM IST
सौरभ श्रीवास्तव/अमर उजाला, नोएडा
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नेाएडा के संजय कुमार गुप्ता को अमेरिका की बहुत बड़ी कंपनी से ऑफर आया था तो वह अहमदाबाद से बंगलूरू शिफ्ट हो गए। हालांकि, राखी और उनके बेटा-बेटी नोएडा में ही रहते थे। यह परिवार मूल रूप से देहरादून का रहने वाला है। 3 मार्च 2013 को अचानक गोवा से संजय को खबर मिली कि उनके बेटे का एक्सीडेंट हो गया है, जिससे उसे ब्रेन हैमरेज हो गया।
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उस दौरान जितार्थ मनीपाल से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। बेटे की वजह से संजय को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी और नोएडा शिफ्ट हो गए। उन्होंने नोएडा में रियल एस्टेट कंसलटेंसी का काम शुरू कर दिया। जितार्थ तभी से कोमा में हैं। उसकी देखभाल के लिए राखी ने दो शिफ्टों में अटेंडेंट को रखा था।

हत्यारोपी सोनू ने जितार्थ के सामने उसकी मां की हत्या कर दी। जितार्थ सब कुछ देख तो रहा था मगर कुछ कर नहीं सकता था। कोमा में होने की वजह से वह कभी घटना की गवाही भी नहीं दे सकता है। वहां पहुंचे लोगों का कहना था कि जितार्थ की सांसें उसकी मां की वजह से ही चल रही थीं। जितार्थ की देखरेख के लिए वह 24 घंटे समस्याओं से जूझती रहती थीं।
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कोमा में रहने वाले मरीज व ब्रेन हैमरेज हो जाने के बाद किसी दृश्य को लाइव देखने के बाद भी उसका विश्लेषण कर पाने की स्थिति में नहीं होते हैं। मरीज घटना को समझन ही नहीं सकता है।
- डॉ. राहुल गुप्ता, सीनियर न्यूरोसर्जन

संजय कुमार गुप्ता की तहरीर पर अटेंडेंट सोनू के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। टीमों को रवाना कर दिया गया है। बहुत जल्द घटना का खुलासा कर दिया जाएगा।
- डॉ. प्रीतिंदर सिंह, एसएसपी

घटना के वक्त जितार्थ ही घर पर था। जिस कमरे में शव मिला, वह जितार्थ का है। वह अपने बिस्तर पर लेटा रहता है। वह 3 मार्च 2013 से कोमा में है। हमें शक है कि घटना को सोनू ने ही अंजाम दिया है।
- राकेश कुमार गुप्ता, संजय के बड़े भाई

गरीब बच्चों को पढ़ाती थीं राखी
राखी को चित्रकारी का भी शौक था। संजय के बड़े भाई राकेश ने बताया कि राखी ने 500 से ज्यादा पेंटिंग बनाई हैं। उन्होंने कई प्रदश्रनी में हिस्सा भी लिया है। चैरिटेबल ट्रस्ट चलाने के वजह से वह गरीब बच्चों को ट्यूशन भी देती थी। दूरदराज से भी बच्चे उनके पास पढ़ने आते थे।

हत्यारोपी ने 1 अप्रैल को ही बदला अपना ठिकाना
सोनू करीब पांच माह पूर्व राखी गुप्ता के घर आया था। वह खुद को मूल रूप से बदायूं का रहने वाला बताता था और यहां मोरना में किराये पर रहता था। जांच में पता चला कि वह 1 अप्रैल को मोरना से कहीं और शिफ्ट हो गया था। राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि 1 अप्रैल को ही उसने सेलरी मांग ली थी। जब राखी ने उसे थोड़े दिन रुकने को कहा तो उसने मजबूरी बताकर सेलरी ले ली थी।

हत्या के बाद कुत्ते को हटवाया
सोमवार सुबह संजय अपने ऑफिस और बेटी कॉलेज चली गई थी। दोपहर 12 बजे सुनीता घर का काम खत्म करने के बाद घर चली गई। इस बीच सोनू घर पर था। करीब 12:30 बजे सोनू ग्राउंड फ्लोर पर गया और मकान मालकिन सीमा खन्ना से अपने पेट डॉग को बाहर से अंदर ले जाने को कहा। सीमा खन्ना ने बताया कि अंतिम बार उन्होंने उसे चुपचाप जाते देखा था।

घर में रखे तीन लाख रुपये मिले
एसएसपी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि अलमारी में रखे करीब तीन लाख रुपये रखे हुए हैं। लूटपाट जैसी कोई घटना सामने नहीं आ रही है। हालांकि, राखी का मोबाइल गायब है। अलमारी खंगाली तो गई हैं मगर लूटे गए सामान के बारे में परिजन नहीं बता पा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि लूट के इरादे से हत्या नहीं की गई है।
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