लोकसभा चुनाव के बाद बतौर गृह मंत्री शाह अचानक पार्टी में राष्ट्रवादी चेहरा बन कर उभरे हैं। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 निरस्त करने और नागरिकता संशोधन बिल को राज्यसभा में बहुमत के अभाव में भी पारित करा लेने के बाद शाह अचानक पार्टी में हिंदुत्व का नया चेहरा बन कर उभरे हैं। अगर शाह चुनाव जिताने में सफल रहते हैं तो पार्टी को हर चुनाव में पीएम मोदी को बतौर चेहरा पेश करने की मजबूरी से निजात मिलेगी।
लगाई पूरी ताकत
चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही शाह ने न सिर्फ रणनीति की सारी जिम्मेदारी ले ली है, बल्कि पूरी ताकत लगा रखी है। उनके करीबी नेताओं के मुताबिक वर्तमान में शाह का कम से कम 18 घंटे का समय रणनीति बनाने और चुनाव प्रचार में लग रहा है। चुनाव प्रचार खत्म होने तक उनकी दैनिक दिनचर्या ऐसी ही रहेगी।
अब तक चुनाव प्रचार से दूर हैं मोदी
आम तौर पर हर चुनाव में शुरू से ही मुखर भूमिका निभाने वाले पीएम मोदी इस बार दिल्ली चुनाव प्रचार से दूर हैं। चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद से अब तक पीएम ने एक भी जनसभा को संबोधित नहीं किया है। पार्टी की योजना अंतिम समय में पीएम की एक के बाद एक तीन रैलियां कराने की है।
शाह की भूमिका पर चर्चा क्यों?
दरअसल भाजपा में 75 साल से अधिक उम्र के नेताओं को जिम्मेदारी नहीं देने की रणनीति है। इस हिसाब से पीएम मोदी के नेतृत्व में पार्टी 2024 में अंतिम चुनाव लड़ेगी। वर्ष 2025 में पीएम की उम्र 75 वर्ष होगी। ऐसे में इस फार्मूले के तहत अ गले चुनाव के एक साल बाद पीएम पद के लिए पार्टी नया चेहरा तय करेगी।