एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा का कहना है कि कार्डियोवेस्कुलर संस्थान के लिए चार साल पहले ही मंजूरी मिल गई थी। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यह संस्थान झज्जर में ही बनना प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि इस संस्थान के निर्माण के लिए एम्स ने एचएससीसी इंडिया लिमिटेड के साथ 2500 करोड़ रुपये का करार भी किया है। इसके तहत निर्माण, टेंडर, बुनियादी ढांचा, उपकरण सहित तमाम संसाधानों की पूर्ति करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
ढाई हजार करोड़ के अस्पताल में होंगे 600 बिस्तर
एम्स प्रबंधन के एक अधिकारी ने बताया कि झज्जर में दो बड़े अस्पताल बनाने की योजना थी। इसलिए सबसे पहले कैंसर अस्पताल तैयार किया गया। करीब डेढ़ महीने पहले ही इसे शुरू किया जा चुका है। धीरे धीरे यहां सुविधाओं का विस्तार करना जारी रहेगा। साथ ही अब कार्डियोवेस्कुलर संस्थान के लिए भी गति बढ़ा दी है। ढाई हजार करोड़ की लागत से बनने वाले इस अस्पताल में दिल के मरीजों के लिए 600 बिस्तरों की सुविधा होगी। साथ ही यहां निशुल्क स्क्रीनिंग कार्यक्रम भी किए जा सकेंगे।
पूरे देश को लीड करेगा संस्थान
बताया जा रहा है कि देश में कार्डिएक अरेस्ट की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसलिए राष्ट्रीय कार्डियोवेस्कुलर संस्थान देश का न सिर्फ ह्दयरोगों के उपचार का अस्पताल होगा, बल्कि ये देश को लीड भी करेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में हार्ट अटैक के मरीजों को कैसे उपचार देना है? इसके बारे में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए जानकारी दी जाएगी। यहां दिल की बीमारियों को लेकर रिसर्च भी होंगी। साथ ही रोबोटिक लैब के अलावा एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टि सहित बायपास सर्जरी निशुल्क उपलब्ध होंगी।