सिविल अस्पताल की दूसरे मंजिल पर 16 बेड के मेडिकल वार्ड को तब्दील कर डेंगू वार्ड बनाया गया है। यहां पर डेंगू-मलेरिया के संदिग्ध सात मरीज भर्ती हैं, लेकिन इन पीड़ित व्यक्तियों से यह बीमारी दूसरों में नहीं फैले, इसके लिए कोई इंतजाम नहीं है।
न तो इन बेड पर कोई मच्छरदानी है और न ही मच्छर भगाने के लिए कोई इंतजाम किया गया है। एक निजी अस्पताल में प्रैक्टिस करने वाले डॉ. रमन शुक्ला बताते हैं कि डेंगू-मलेरिया एडीज मच्छर से फैलने वाली एक बीमारी है। एक पीड़ित व्यक्ति को एक मच्छर काटने के बाद दूसरे को काटने पर उसे भी डेंगू या मलेरिया हो जाएगा।
आईसोलेशन वार्ड
-डेंगू पीड़ित व्यक्ति में प्लेटलेट्स कम होने या स्थिति अधिक गंभीर होने की सूरत में आईसोलेशन वार्ड में भर्ती किया जाता है। फिलहाल आईसोलेशन वार्ड में कोई मरीज नहीं है और इंतजाम भी शून्य है। यहां लगे छह बेड में से केवल चार पर मच्छरदानी है।
जबकि आईसोलेशन वार्ड में इंसेक्ट कैचर, इंफेक्शन फ्री सुविधा होनी चाहिए। आईसोलेशन वार्ड की गाइडलाइन है कि मरीज भर्ती होने के बाद मच्छरदानी से नहीं निकल सकते हैं लेकिन यहां भर्ती मरीज मच्छरदानी खोल देते हैं। ऐसे में डेंगू के मच्छर काटने पर ये अस्पताल दूसरों को डेंगू का वायरस दे सकता है।