30वें वर्ष में पहुंची उत्तराखंड नवयुवक धार्मिक रामलीला कमेटी
देवभूमि की संस्कृति और परंपरा की दिख रही झलक
संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली। दिल्ली के मयूर विहार में आयोजित उत्तराखंड नवयुवक धार्मिक रामलीला कमेटी की रामलीला इस वर्ष अपने 30वें वर्ष में पहुंच गई है। अपनी विशिष्ट शैली, धार्मिक आस्था और उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपराओं के लिए पहचान बनाने वाली यह रामलीला लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
नीलम माता मंदिर के ठीक सामने आयोजित इस रामलीला में केवल रामकथा का मंचन किया जाता है। आयोजकों का कहना है कि रामलीला का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों और उनके जीवन से जुड़ी शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाना है।
इस रामलीला की एक खास बात यह भी है कि इसमें सभी किरदार स्थानीय बच्चे निभाते हैं। उत्तराखंड मूल के लोग आपसी सहयोग से इसका आयोजन करते हैं। रामलीला का मंचन उत्तराखंड की पारंपरिक भीमताली शैली में किया जाता है, जिसमें क्षेत्र की लोक-सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलती है।
मंच के निदेशक मोहन रावत के अनुसार, यहां संवाद बोलने के लिए बैकग्राउंड से किसी अन्य व्यक्ति की आवाज का इस्तेमाल नहीं किया जाता। प्रत्येक पात्र अपने संवाद स्वयं बोलता है। मंचन के दौरान पहले संस्कृत मंत्रों का उच्चारण किया जाता है और इसके बाद उनका हिंदी अनुवाद भी सुनाया जाता है।