गुड़गांव संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले प्रमुख दलों के प्रत्याशी ‘आप’ से प्रभावित लगते हैं। जनता के बीच पहुंचते ही यह खुद को आम आदमी साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते।
कांग्रेस प्रत्याशी कहते हैं कि वह फौजी के बेटे हैं। खेती-किसानी उनका पेशा है। हमेशा आम लोगों के बीच रहते हैं। वह आज तक विदेश भी नहीं गए। यही भाषा दूसरे प्रत्याशियों की भी है।
उनमें से एक का कहना है कि उनके पिता कई बार मंत्री और सांसद रहे। फिर भी उन्होंने आम आदमी की राजनीति की। आज भी वह आम आदमी के लिए सक्रिय हैं। चुनाव जीतकर वह प्रवासियों के लिए कुछ अलग करना चाहते हैं।
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बसपा प्रत्याशी भी खुद को आम आदमी बताते हैं। अन्य प्रत्याशियों से बात करने पर वह खुद को ऐसा जाहिर करते हैं कि सत्ता के करीब रहते हुए उन्होंने संघर्षों भरा जीवन जिया है।
चुनावी मौसम में सभी जनता के नुमाइंदे खुद को आम आदमी बताने पर तुले हैं। लेकिन सत्ता में आने के बाद कुछ के लिए जनता तक पहुंचना और जनता को उन तक पहुंचना भी दूर की कौड़ी हो जाती है। कई उम्मीदवार ऐसे भी हैं जिनसे चुनावी मौसम में भी फोन पर संपर्क साधना कठिन काम है।
सियासत से गहरा नाता
गुड़गांव से चुनाव लड़ने वाले लगभग सभी प्रमुख उम्मीदवारों का सत्ता से गहरा नाता है। इनेलो प्रत्याशी चौधरी जाकिर हुसैन खुद विधायक रहे हैं। वह मेवात के बड़े सियासी घराने से आते हैं। कांग्रेस प्रत्याशी राव धर्मपाल को लंबा सियासी अनुभव प्राप्त है। सूबे के कई बार मंत्री और विधायक रह चुके हैं। भाजपा प्रत्याशी राव इंद्रजीत सिंह तीन बार सांसद रहे हैं। केंद्र में मंत्री भी रहे। उनके पिता सूबे के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। जबकि, आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार योगेंद्र यादव की दिल्ली की ‘आप’ सरकार में लंबी पहुंच थी।