सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की नई रिपोर्ट में दावा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। इस साल आने वाले अल नीनो का सबसे अधिक असर देश के बिजली तंत्र पर पड़ेगा। इसका सीधा प्रभाव दिल्ली जैसे बड़े शहरों पर भी देखने को मिल सकता है, जहां गर्मी में बिजली की मांग पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है। यह दावा सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की नई रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अल नीनो के कारण तापमान बढ़ेगा, जिससे दिल्ली में एसी और कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ेगा। इससे बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ेगी। वहीं, हवा की रफ्तार कम होने और बारिश घटने से पवन और जल विद्युत उत्पादन प्रभावित होगा, जिससे बिजली आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।
सीआरईए की नई रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2026 से जून 2027 के बीच देश में कूलिंग की अतिरिक्त बिजली मांग करीब 10 टेरावाट प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जो दिल्ली की सालाना बिजली खपत के लगभग एक-चौथाई के बराबर है। वहीं, बिजली उत्पादन में कमी और बढ़ती मांग को मिलाकर देश में करीब 18 टेरावाट प्रति घंटे का बिजली अंतर (जनरेशन गैप) पैदा होने की आशंका है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कमी को पूरा करने के लिए कोयला आधारित बिजली उत्पादन बढ़ाना पड़ सकता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में भी बढ़ोतरी होगी। यदि अल नीनो का असर अधिक रहा, तो बिजली ग्रिड पर दबाव बढ़ने के साथ-साथ पानी की कमी और अन्य चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हाल ही में देश में भीषण गर्मी के दौरान बिजली की मांग रिकॉर्ड 270 गीगावाट तक पहुंच गई थी। ऐसे में दिल्ली जैसे महानगरों में बिजली की लगातार और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बन सकता है। रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि भविष्य की ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और बिजली ग्रिड को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम किया जाए। रिपोर्ट के अनुसार, सौर ऊर्जा पर अल नीनो का असर बहुत कम पड़ता है। यह भविष्य में दिल्ली समेत देश के बड़े शहरों की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकती है।