मोहन पासवान गुरुग्राम में किराये पर ऑटोरिक्शा चलाते हैं लेकिन वह चोटिल हो गए थे। उन्होंने ऑटो भी वाहनमालिक को लौटा दिया था। आय का कोई साधन नहीं था तब बेटी के दिए हौसले से पिता ने पुरानी साइकिल ली और बेटी ने पिता को घर पहुंचाने की जिम्मेदारी ली और बड़ी बहादुरी से निभाई भी।
कम्पूयटर पर देंगी ट्रायल
सीएफआई के चेयरमैन ओंकार सिंह ने कहा कि अगर वह हमारे मापदंड पर खरी उतरती है तो उसकी पूरी सहायता करेंगे। हमने इस बहादुर लड़की से बात की है। उसे बताया गया है कि जैसे ही लॉकडाउन खत्म होता है, जल्द से जल्द उसे दिल्ली बुलाया जाएगा। यदि वह किसी अन्य को अपने साथ लाना चाहती हैं तो उसकी अनुमति भी है।
यात्रा वह अन्य खर्च सीएफआई उठाएगा। उसे अकादमी में कम्पूयटराइज्ड साइकिल पर बिठाया जाएगा। हम देखेंगे कि क्या वह चयन के हमारे सात और आठ पैरामीटर को पास कर पाती है। हमारे पास 14-15 आयुवर्ग में 10 साइक्लिस्ट हैं।
07 : दिन में 1200 किमी का सफर तय किया 15 साल की लड़की ने
ज्योति में निश्चित रूप से कुछ खास है। 1200 किमी साइकिल चलाना कोई आसान काम नहीं है। पंद्रह साल की इस लड़की में शारीरिक ताकत और स्टेमिना है। हम उसी का परीक्षण करेंगे।
-ओंकार सिंह, चेयरमैन सीएफआई