केंद्र की वायु मानक संस्था सफर इंडिया के मुताबिक, बीते 24 घंटे में पीएम 2.5 से बड़े कणों की पीएम 10 में 55 फीसदी हिस्सेदारी रही है। दक्षिण-पश्चिमी मानसून की विदाई की वजह से हवा की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ेगा। अगले तीन दिनों तक हवा की रफ्तार आठ से 18 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रहेगी। मौसमी परिस्थितियों में हुए बदलाव की वजह से वायु गुणवत्ता औसत से खराब श्रेणी में बनी रहेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि अभी पराली से होने वाले प्रदूषण की दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण में न के बराबर हिस्सेदारी है। स्थानीय स्तर पर होने वाला प्रदूषण व वाहनों से होना वाला उत्सर्जन इस समय प्रदूषण का अहम कारक है। साथ ही हवा की रफ्तार भी कम है। यही वजह है कि हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है। शनिवार को पीएम 10 का स्तर 167 व पीएम 2.5 का स्तर 79 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर रिकॉर्ड किया गया।
भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान के मुताबिक, इस समय हवा की दिशा उत्तर-पश्चिम बनी हुई है। अगले तीन दिनों तक हवा की दिशा में बदलाव की संभावना नहीं है। शनिवार को मिक्सिंग हाइट का स्तर 2800 मीटर रहा, जो कि अगले 24 घंटे में घटकर 2650 व मंगलवार को दो हजार मीटर तक हो सकता है। वहीं, वेंटिलेशन इंडेक्स का स्तर शनिवार को 15900 वर्ग मीटर प्रति सेकेंड दर्ज किया गया है। अगले 24 घंटे में इसके 19500 वर्ग मीटर प्रति सेकेंड रहने की संभावना है। वहीं, मंगलवार तक यह 16300 वर्ग मीटर प्रति सेकेंड रह सकता है।