प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों के तहत चल रहे ऑड-ईवन अभियान के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दिल्ली में वायु प्रदूषण की खतरनाक स्थिति को रेखांकित किया है।
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डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली दुनिया के उन शहरों में शुमार है जहां वायु प्रदूषण का स्तर उच्च स्तर पर है। हालांकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़े डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट से मेल नहीं खाते।
केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि डब्ल्यूएचओ ने दुनिया के 91 देशों के 1600 शहरों में बारीक धूल कणों के संबंध में अध्ययन किया है। कंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का मानना है कि डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों में सभी निगरानी केंद्रों को शामिल नहीं किया गया है।
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इसलिए प्रदूषण के मामले में शहरों की रैंकिंग संभव नहीं है
सम-विषम का सूरत-ए-हाल
- फोटो : विवेक निगम/अमर उजाला, नई दिल्ली
सीपीसीबी ने दिल्ली के अलावा आगरा, इलाहाबाद, अमृतसर, फिरोजाबाद, लखनऊ, कानपुर और लुधियाना समेत देश के 13 प्रमुख शहरों में वायु प्रदूषण के स्तर पर गहन अध्ययन कर रिपोर्ट बनाई है। इसके आंकड़े डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट से मेल नहीं खाते।
इसलिए प्रदूषण के मामले में शहरों की रैंकिंग संभव नहीं है। जावड़ेकर ने राज्यसभा में तीन सवालों के अलग-अलग लिखित उत्तर में कहा कि ऐसा कोई निर्णायक आंकड़ा नहीं है, जिससे साबित हो कि घुटन के कारण घरों के अंदर होने वाली मौतों का वायु प्रदूषण से सीधा संबंध है।
जावड़ेकर ने बताया कि आईआईटी कानपुर के दिल्ली में वायु प्रदूषण संबंधी व्यापक अध्ययन के मुताबिक केंद्र ने दिल्ली सरकार को दिशा निर्देश जारी किए हैं।
केंद्र और दिल्ली सरकार गंभीर
सम-विषम
सीपीसीबी के दिशा निर्देश
- वाहनों का उत्सर्जन नियंत्रित करना
- सड़कों की धूल पर नियंत्रण
- बायो मास जलाने पर रोक
- औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण
- निर्माण और भवनों के ध्वंस के कारण प्रदूषण पर नियंत्रण
जावड़ेकर के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ और सीपीसीबी के आंकड़ों में मेल न होने के बावजूद केंद्र और दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण की कार्ययोजना को गंभीरता से लागू किया है। इसके तहत कचरे, प्लास्टिक और पत्तियों के जलाने पर रोक लगाई गई है। स्वच्छ दिल्ली ऐप और दिल्ली की हेल्पलाइन काम करने लगी है। इसके अलावा निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के मानकों के अपुरूप कार्य के लिए औचक निरीक्षण जैसे कार्यक्रम कार्यान्वित होने हैं। साथ ही दिल्ली के हरित क्षेत्र में बढ़ोत्तरी की कार्ययोजना पर अमल हो रहा है।
राजधानी के बॉर्डर इलाकों में दर्ज हुआ सबसे अधिक प्रदूषण
राजधानी की आबोहवा में सम-विषम स्कीम का असर देखा जा रहा है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) की ओर से शनिवार को राजधानी में लिए गए परिवेशी वायु गुणवत्ता के नमूनों में अधिकांश इलाकों में पर्टिकुलेट मैटर (हवा में मौजूद बारीक कण) 2.5 के स्तर में कमी दर्ज की गई है। डीपीसीसी ने यह आंकड़े सोमवार को जारी किए। वहीं, अधिकांश स्थानों पर पीएम 10 अब भी अपने तय मानक से अधिक रिकॉर्ड किया गया है। खासतौर से सीमावर्ती इलाकों जैसे आनंद विहार, नोएडा बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर में अति सूक्ष्म और सूक्ष्म पर्टिकुलेट मैटर तय मानकों से कई गुना ज्यादा रिकॉर्ड किया गया है।
डीपीसीसी के मोबाइल वैन के जरिये राष्ट्रीय राजधानी में कुल 74 स्थानों से लिए गए परिवेशी वायु गुणवत्ता रिपोर्ट के मुताबिक, 45 स्थानों पर पर्टिकुलेट मैटर 2.5 अपने तय मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से कम दर्ज किया गया। वहीं 17 स्थानों पर पीएम 10 अपने सामान्य मानक 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से कम दर्ज किया गया।
यहां बता दें कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के रियल टाइम आंकड़ों में रविवार को परिवेशी वायु गुणवत्ता में सुधार देखा गया था, हालांकि सोमवार को फिर से प्रदूषण स्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। रोजाना आंकड़े जारी करने वाली द एनर्जी रिसोर्सेज एंड इंस्टीट्यूट (टेरी) की मानें तो प्रदूषण स्तर में उतार-चढ़ाव हवा की गति और मौसम में आ रहे बदलाव के कारण दर्ज किया जा रहा है।