केंद्रीय नियंत्रण प्रदूषण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, राजधानी के आनंद विहार समेत अन्य दूसरे इलाकों में एक्यूआई 300 के पार दर्ज किया गया। यह हवा की बेहद खराब श्रेणी है। पर्यावरण विशेषज्ञों का दावा है कि दीपावली के बाद हवा की हालत ज्यादा खराब हो सकती है। ऐसे में दिल्ली-एनसीआर में ग्रेप दो की पाबंदियां जल्द लागू होने के आसार हैं। 2015 से लेकर 2024 तक के आंकड़े बताते हैं कि हर साल दिवाली और उससे अगले दिन प्रदूषण के स्तर में तेजी से वृद्धि हुई है।
पाबंदियों में उम्रदराज वाहनों पर फिलहाल रोक नहीं
ग्रेप के पहले चरण की पाबंदियां दिल्ली एनसीआर में लागू हो गई हैं, लेकिन इनमें से उम्रदराज वाहनों पर रोक सुनिश्चित करने की मुहिम को हटा लिया गया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की ओर से जारी आदेश में इस बाबत कुछ नहीं कहा गया है। 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को उम्र के आधार पर हटाने का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। सीएक्यूएम ने भी उक्त निर्देश को अपने आदेश से हटा लिया है। यानी पुराने वाहन अभी भी चलते रहेंगे और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।
सीएक्यूएम ने ग्रीन पटाखों के निर्देश की भाषा बदली
कमोबेश यही स्थिति पटाखों पर प्रतिबंध के क्रियान्वयन को लेकर है। ग्रेप के पहले चरण की कार्ययोजना में 19 नंबर बिंदु पटाखों पर प्रतिबंध को सख्ती से क्रियान्वित कराने से जुड़ा है। पटाखों पर लागू प्रतिबंध के खिलाफ भी दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट में जा चुकी है, तो सीएक्यूएम ने इस आशय के निर्देश की भाषा भी बदल दी है। आदेश में कहा गया है कि पटाखों को लेकर कोर्ट और ट्रिब्यूनल के आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाए। प्रतिबंध शब्द हटा लिया गया है।
ग्रीन पटाखों से 35% तक कम प्रदूषण
वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) व राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) के विज्ञानियों के अनुसार ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों से बेहतर हैं क्योंकि इनका कैमिकल फार्मूला ऐसा है जिससे पानी की बूंदें निकलती हैं। इससे प्रदूषण कम होता है इनमें प्रदूषण 30 से 35 प्रतिशत तक कम होता है।