दूसरी तरफ 35 निगरानी केंद्रों पर एक्यूआई 301 से 400 के बीच दर्ज किया गया। यह बहुत खराब श्रेणी में आता है। वहीं, चार केंद्रों पर एक्यूआई 201 से 300 के बीच दर्ज किया गया। इसका मतलब है कि दिल्ली के किसी भी निगरानी केंद्र पर हवा की गुणवत्ता मध्यम या इससे बेहतर श्रेणी में नहीं रही। सबसे कम एक्यूआई आईएमडी लोदी रोड पर 277 दर्ज किया गया। दिल्ली कैंट में यह 281, टिकरी कलां में 294 और एनएसआईटी द्वारका में 297 रहा।
जहांगीरपुरी के अलावा कई दूसरे इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया। नरेला में एक्यूआई 430, विवेक विहार में 429, अलीपुर में 424, मुंडका में 415 और बवाना में 407 रहा। आईटीओ में भी एक्यूआई 402 दर्ज किया गया। वहीं, आनंद विहार में 334 और चांदनी चौक में 354 एक्यूआई रहा।
कई निगरानी केंद्रों पर पीएम 2.5 मिला
कई निगरानी केंद्रों पर पीएम 2.5 प्रमुख प्रदूषक के रूप में दर्ज किया गया। जहांगीरपुरी और पंजाबी बाग में भी पीएम 2.5 प्रमुख प्रदूषक रहा। वहीं, आईआईटी दिल्ली और दिल्ली कैंट समेत कुछ केंद्रों पर पीएम 10 का स्तर प्रमुख रहा। सीपीसीबी के मुताबिक, 301 से 400 के बीच एक्यूआई रहने पर लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से कई बीमारियां हो सकती हैं। वहीं, 401 से 500 के बीच का स्तर स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित कर सकता है। फेफड़े और दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह ज्यादा गंभीर हो सकता है।
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की परत होगी और मोटी
मौसमी दशाएं प्रतिकूल होने से दिल्ली-एनसीआर की हवा में प्रदूषण का संकट और भी गहराने का अंदेशा है। आठ अक्तूबर को प्रदूषकों को दूर ले जाने वाली सभी दशाएं सुस्त होंगी। ऐसे में दिवाली पर पटाखा जलने से दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की चादर मोटी हो सकती है। आईआईटीएम के मुताबिक, हवाओं की चाल शुक्रवार शाम से ही थम सकती है।
प्रदूषण बढ़ने की एक बड़ी वजह हवा की रफ्तार में कमी
प्रदूषण बढ़ने की एक बड़ी वजह हवा की रफ्तार में कमी और प्रदूषकों के फैलाव के लिए प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां हो सकती हैं। छह और सात नवंबर को दोपहर में हवा की रफ्तार 15 से 18 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने के बाद शाम-रात में घटकर पांच किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। आठ नवंबर को स्थिति और प्रतिकूल हो सकती है। इस दिन सुबह हवा की गति आठ, दोपहर में 10 और शाम-रात में 15 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने का अनुमान है। हवा की दिशा भी उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पूर्व और फिर पूर्व की ओर बदल सकती है।