अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एक और गड़बड़झाले का खुलासा हुआ है। अदालत से दोषी करार दिए जाने के बाद भी एम्स के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरसी आनंद और पूर्व जूनियर स्टोर अफसर वीएन सिंह पेंशन-ग्रेच्युटी ले रहे थे।
एम्स-प्रशासन ने इस गड़बड़झाले को पकड़ कर दोनों का जीवन भर के लिए पेंशन रोक दिया है। तीन वर्ष पूर्व दोनों को स्पेशल जज ने सजा सुनाई थी। इसमें अस्पताल के एक अधिकारी भी सहयोगी थे। उस अधिकारी को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
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सूत्रों के मुताबिक एम्स में मुख्य सर्तकर्ता अधिकारी नियुक्त होने के बाद यह मामला उजागर हुआ। वर्ष 1998 में एम्स के चिकित्सा अधीक्षक रहे डॉ. आनंद अस्पताल में कॉटन सप्लाई करने वाली कंपनी शीफा साइंटिफिक फाइबर्स फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी देकर रिश्वत की मांग कर रहे थे।
फर्म मालिक सगीर अहमद खान ने भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के साथ मिलकर एमएस से हुई बातचीत की सीडी तैयार कर ली थी। जिसके बाद 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए एमएस डॉ. आनंद को 20 जुलाई-1998 को गिरफ्तार किया गया था। वर्ष-2012 में पूर्व एमएस को तीन वर्ष और स्टोर अफसर को सबूत मिटाने का दोषी करार देते हुए एक वर्ष कैद की सजा सुनाई गई थी।