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ग्रेटर नोएडा में एम्स को कैबिनेट की मंजूरी

Tue, 19 Jan 2016 02:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
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ग्रेटर नोएडा में सूबे का तीसरा चिकित्सा विश्वविद्यालय बनाने की आस छोड़ अब यहां सरकार ने आयुर्विज्ञान संस्थान बना दिया है। सोमवार को अखिलेश यादव की कैबिनेट ने ग्रेटर नोएडा आयुर्विज्ञान संस्थान को मंजूरी दे दी।
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यहां पर एमबीबीएस की 150 सीटें होंगी। इसे भी सोसाइटी एक्ट के तहत चलाया जाएगा। माना जा रहा है कि 2017 से यहां मेडिकल की पढ़ाई शुरू हो जाएगी।

दरअसल, प्रदेश सरकार ने ग्रेटर नोएडा में करीब 600 करोड़ रुपये खर्च कर एक बड़ा अस्पताल व अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया था। बाद में सरकार ने इसे मेडिकल विश्वविद्यालय बनाने का निर्णय लिया।

यह प्रस्ताव सरकार ने पास कर दिया लेकिन फाइनेंसियल बिल होने के बावजूद इस पर राज्यपाल की अनुमति नहीं ली थी। इस कारण यह विधेयक ठंडे बस्ते में चला गया था।
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ऐसे में सरकार ने फिलहाल इसे मेडिकल कॉलेज के रूप में संचालित करने का निर्णय ले लिया है। सोमवार को इसी की सोसाइटी एक्ट में मंजूरी मिल गई है।

शुरू से ही रहा विवाद
ग्रेटर नोएडा के अस्पताल को चिकित्सा विश्वविद्यालय बनाने में शुरुआत से ही अड़ंगे लगे। 14 फरवरी 2014 की कैबिनेट बैठक में इसका विधेयक मंजूर किया गया। राज्यपाल की अनुमति न लेने के कारण विधानसभा में यह फाइनेंसियल बिल पास नहीं हो सका।

21 अक्टूबर 2014 को कैबिनेट बैठक में सरकार ने इसका आर्डीनेंस पास कर दिया। सरकार ने यहां भी चूक की। इसी कैबिनेट में उसने 14 नवंबर 2014 से सत्र आहूत किये जाने का प्रस्ताव भी पास कर दिया।
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