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एम्स के डॉक्टरों ने निकाला सबसे बड़ा ट्यूमर

Fri, 17 Jul 2015 03:56 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के चिकित्सकों ने देश में सबसे बड़ा ट्यूमर (मल्टी नॉड्यूलर ग्वायटर) निकालने का कीर्तिमान स्थापित किया।
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साथ ही उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद  (दसनपुर कलां गांव) की रहने वाली नूरजहां को नई जिंदगी भी दी। करीब 20 वर्ष से घेघा बीमारी से पीड़ित नूरजहां अब पूरी तरह स्वस्थ है।

चिकित्सकों ने उसकी थॉयराइड ग्रंथी की सर्जरी कर गर्दन से पेट के ऊपरी हिस्से तक लटके 2.916 किलोग्राम का ट्यूमर को निकाल लिया है।  सर्जरी विभाग की डॉ. प्रत्युशा ने बताया कि  पहले मरीज के सभी तरह की रेडियोलॉजी जांच की गई।
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सर्जरी में लगे 6 घंटे

इसके बाद सर्जरी का निर्णय लिया गया। मरीज को 20 मई को अस्पताल में भर्ती कराया गया और 8 जून को सर्जरी की गई। आमतौर पर इस तरह की सर्जरी में दो से तीन घंटे लगते हैं।

लेकिन, इस सर्जरी में छह घंटे से ज्यादा समय लगा। सर्जरी के बाद भी करीब छह घंटे तक मरीज को आईसीयू में रखा गया। करीब 12 दिन बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

सर्जरी के बाद उन्हें बोलने में किसी तरह की परेशानी  नहीं है। डॉ. प्रत्युशा ने बताया कि नूरजहां आठ बार गर्भवती हुई थी। बार-बार गर्भवती होने अथवा शरीर में ऑयोडिन की कमी के कारण  यह बीमारी हो सकती है।

दब रही थी सांस की नली

डॉक्टरों के मुताबिक, ट्यूमर का आकार और वजन ज्यादा होने की वजह से मरीज की सांस की नली दब रही थी। इसके चलते सर्जरी से पहले लोकल एनेस्थिसिया देकर मरीज को सांस की नली डाली गई।

कुछ समय तक और सर्जरी टाली जाती तो मरीज को काफी दिक्कत हो सकती थी। सांस लेने तक में मरीज को तकलीफ होने लगती।  अच्छी बात यह थी कि ट्यूमर शरीर के बाहर ही फैला हुआ था।

शरीर के अंदर ट्यूमर का यही आकार होता तो मरीज के कई अंग प्रभावित हो सकते थे। सर्जरी और भी मुश्किल हो जाती।
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पहली बार देश में हुआ संभव

एम्स सर्जरी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक सुनील चुबर के मुताबिक एम्स में हर साल इस तरह की 150-175 सर्जरी होती है। लेकिन, पहली बार इतना बड़ा ट्यूमर देश के किसी अस्पताल में निकाला गया है।

दुनिया में एक किलोग्राम अथवा इससे थोड़ा ज्यादा वजन की करीब पांच सर्जरी की गई है।

इससे पहले जर्मनी में 5.1 और स्वीडन में 4.7 किलोग्राम का थॉयराइड  ग्रंथी का ट्यूमर निकाला जा चुका है। लेकिन, सर्जरी के बाद स्वीडन के मरीज की मौत हो गई थी।
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