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दिल्ली: एम्स की ओपीडी में घटी महिला मरीजों की संख्या, चार राज्यों से चार लाख लापता

Fri, 09 Aug 2019 03:53 AM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • पुरुष मरीजों की संख्या महिलाओं की तुलना में कई गुना अधिक
  • महिला और पुरुषों के बीच लिंगानुपात पर अध्ययन
  • दिल्ली के अलावा हरियाणा, यूपी और बिहार के मरीजों को किया शामिल
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एम्स - फोटो : Social Media (File Photo)
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विस्तार
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देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स में सालाना महिलाओं से ज्यादा पुरुषों के उपचार कराने को लेकर अक्सर सवाल खड़े होते हैं। हर वर्ष एम्स की वार्षिक रिपोर्ट में जब ओपीडी के मरीजों की जानकारी दी जाती है तो उसमें पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में कई गुना अधिक होती है। इसे लेकर अब तक कोई सटीक जबाव भी एम्स के डॉक्टरों से नहीं मिला, लेकिन एम्स ने आखिरकार इसकी पूरी जानकारी एकत्रित की है।

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एम्स आने वाले महिला और पुरुषों के बीच लिंगानुपात को लेकर किए इस अध्ययन में एम्स का खुलासा है कि उनके यहां पुरुष मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है। वर्ष 2016 में 23 लाख से ज्यादा मरीजों ने एम्स की ओपीडी में पंजीयन कराया था। इन मरीजों को अगर लिंगानुपात में विभाजित करके देखने पर 1.69 पुरुष मरीजों पर एक महिला मरीज की जानकारी सामने आई है।

इस अध्ययन में एम्स के डॉक्टरों ने दिल्ली के अलावा हरियाणा, यूपी और बिहार से आने वाले मरीजों को भी शामिल किया है। डॉक्टरों का कहना है कि दिल्ली एम्स में सबसे ज्यादा मरीज इन्हीं चारों राज्यों से आते हैं। इन राज्यों की आबादी को जनगणना 2011 से जोड़ते हुए अध्ययन करने पर सामने आया कि 4 लाख से ज्यादा महिला मरीज मिसिंग हैं। 
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एम्स के वरिष्ठ डॉ. अंबुज राय के अनुसार सबसे पहले अध्ययन के दौरान एम्स आने वाले मरीजों का लिंगानुपात निकाला गया। इसके बाद वे जिस राज्य से आए थे, उसके अनुसार लिंगानुपात एकत्रित किया गया।

अंत में वर्ष 2011 जनगणना की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित राज्य के लिंगानुपात से तुलना करते हुए एम्स आने वाले मरीजों का पता लगाया गया। इस अध्ययन में डॉक्टरों को लाखों की तादाद में महिला मरीजों के मिसिंग होने का पता चला। इसीलिए उन्होंने इस रिपोर्ट का नाम मिसिंग फीमेल पेशेंट नाम दिया।

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डॉक्टरों के अनुसार वर्ष 2016 में एम्स में 0 से 60 या उससे ज्यादा उम्र के 14 लाख 94 हजार 441 पुरुष मरीजों ने अपना पंजीयन कराया। जबकि इसी दौरान 8 लाख 82 हजार 582 महिला मरीजों ने अपना इलाज कराया। 

इनमें से अगर अलग अलग राज्य पर बात करें तो दिल्ली से 6 लाख 63 हजार 406 पुरुष और 4 लाख 84 हजार 160 महिला मरीजों ने ओपीडी में उपचार कराया। इनके बीच लिंगानुपात 1.37 पुरुष पर एक महिला के रुप में सामने आया। बिहार से 2 लाख 716 पुरुष और 84 हजार 926 महिला मरीजों ने पंजीयन कराया। इनके बीच सर्वाधिक 2.36 लिंगानुपात देखने को मिला।

वहीं यूपी से 3 लाख 59 हजार 914 पुरुष और 1 लाख 71 हजार 033 महिलाओं ने साल भर विभिन्न ओपीडी में अपना इलाज कराया। इनके बीच 2.10 रहा। हरियाणा की बात करें तो वहां से दिल्ली एम्स इलाज के लिए 1 लाख 36 हजार 029 पुरुषों के अलावा 81 हजार 199 महिला मरीज पहुंची। इनका लिंगानुपात 1.68 मिला। जब इन्हीं राज्यों की 2011 जनगणना से तुलना करते हुए अध्ययन किया गया तो पुरुष और महिलाओं के बीच लिंगानुपात क्रमशः 1.15, 1.09, 1.10 और 1.14 दर्ज किया गया।

हालांकि इनके अलावा भी राजस्थान, एमपी, पंजाब, जम्मू इत्यादि राज्यों से मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इन सभी राज्यों की बात करें तो लिंगानुपात 2.19 दर्ज किया है। लगातार कम होती महिला मरीजों की संख्या को लेकर एम्स के डॉक्टरों ने काफी चिंता व्यक्त की है। महिलाओं की संख्या कम होने के पीछे कहीं न कहीं सामाजिक भ्रांतियों और भेदभाव की ओर ये अध्ययन इशारा भी कर रहा है।
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