डॉक्टरों के अनुसार वर्ष 2016 में एम्स में 0 से 60 या उससे ज्यादा उम्र के 14 लाख 94 हजार 441 पुरुष मरीजों ने अपना पंजीयन कराया। जबकि इसी दौरान 8 लाख 82 हजार 582 महिला मरीजों ने अपना इलाज कराया।
इनमें से अगर अलग अलग राज्य पर बात करें तो दिल्ली से 6 लाख 63 हजार 406 पुरुष और 4 लाख 84 हजार 160 महिला मरीजों ने ओपीडी में उपचार कराया। इनके बीच लिंगानुपात 1.37 पुरुष पर एक महिला के रुप में सामने आया। बिहार से 2 लाख 716 पुरुष और 84 हजार 926 महिला मरीजों ने पंजीयन कराया। इनके बीच सर्वाधिक 2.36 लिंगानुपात देखने को मिला।
वहीं यूपी से 3 लाख 59 हजार 914 पुरुष और 1 लाख 71 हजार 033 महिलाओं ने साल भर विभिन्न ओपीडी में अपना इलाज कराया। इनके बीच 2.10 रहा। हरियाणा की बात करें तो वहां से दिल्ली एम्स इलाज के लिए 1 लाख 36 हजार 029 पुरुषों के अलावा 81 हजार 199 महिला मरीज पहुंची। इनका लिंगानुपात 1.68 मिला। जब इन्हीं राज्यों की 2011 जनगणना से तुलना करते हुए अध्ययन किया गया तो पुरुष और महिलाओं के बीच लिंगानुपात क्रमशः 1.15, 1.09, 1.10 और 1.14 दर्ज किया गया।
हालांकि इनके अलावा भी राजस्थान, एमपी, पंजाब, जम्मू इत्यादि राज्यों से मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इन सभी राज्यों की बात करें तो लिंगानुपात 2.19 दर्ज किया है। लगातार कम होती महिला मरीजों की संख्या को लेकर एम्स के डॉक्टरों ने काफी चिंता व्यक्त की है। महिलाओं की संख्या कम होने के पीछे कहीं न कहीं सामाजिक भ्रांतियों और भेदभाव की ओर ये अध्ययन इशारा भी कर रहा है।