नशा मुक्ति अभियान के दौरान आप विधायक अलका लांबा पर हुए हमले के बाद अलका ने कहा है कि ये हमला उनको टारगेट बनाकर नहीं किया गया है और न ही हमलावरों का ये उद्देश्य था।
आप विधायक के मुताबिक हमलावर उनके अभियान को बाधित करना चाहते थे। उनका उद्देश्य अभियान के दौरान जुटी भीड़ को तितर-बितर करना था।
उन्होंने कहा कि जब ये हमला हुआ उस दौरान उनके साथ 3-4 पुलिस कर्मी भी मौजूद थे और नशा मुक्ति अभियान को लेकर लोगों में उत्सुकता थी।
हालांकि अलका लांबा पर हमले के बाद ट्विटर और फेसबुक पर लोग आप विधायक पर ही हमला कर रहे हैं। यूजर्स के मुताबिक यह महज एक ड्रामा है।
...तो ड्रामा कर रही हैं अलका
कुछ यूजर्स ने अलका लांबा के हमले वाले फोटो पोस्ट कर उनकी चोट को फर्जी और ड्रामा बताया है। उनका मानना है कि जब आम आदमी पार्टी की महिला विधायक ही आप सरकार में सुरक्षित नहीं हैं तो वे राजधानी की अन्य महिलाओं को कैसे सुरक्षा दे सकेंगे।
वहीं अलका लांबा ने ट्विटर पर लिखा है कि 'नशे के खिलाफ लड़ाई का अंजाम... मुझ पर हमला कर मेरा सिर फाड़ दिया गया, खून बहने के वावजूद भी मैं मैदान नहीं छोडूंगी.. अगस्त क्रांति दिवस..। 9 अगस्त क्रांति दिवस .. नशे के खिलाफ यह जंग जारी रहेगी.. यह हमारी जिद्द है।'
गौरतलब है कि इस अभियान को लेकर अलका लांबा पिछले कई घंटो से लगातार ट्विटर पर सक्रिय थी और जानकारी दे रही थी।
अभियान की लगातार जानकारी दे रही थी विधायक
उन्होंने शनिवार को लिखा था, जहाँ से कल (9 अगस्त) इस अभियान की शुरुवात की जा रही है यह ऐतिहासिक लाल क़िले से जुड़ा इलाका है,खुले में नशा करने वाले अधिकतर लोग बेघर है।
इसके बाद ट्विट किया कि 'मैं आप सभी साथियों से इस अभियान से जुड़ने की अपील करती हूँ,कुछ पाने के लिये(देश के लिये)कुछ खोना(आराम)तो पड़ता है। आज़ादी भी यूँ ही नहीं मिली..।'
इसके बाद उन्होंने पुरानी राज्य सरकारों और दिल्ली पुलिस की नाकामी पर लिखा कि अभी तक की सरकारें हो या दिल्ली पुलिस हालात देकर लगता है की अब तक पूरी तरहा से नशा रोकने में असफल रही ईमानदारी से बदलाव के लिये एक और प्रयास।