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कत्ल के बाद नहर में मगरमच्छों के लिए फेंक देता था शव... खून के सुबूत मिटाने में माहिर रहा है डॉक्टर डेथ

Thu, 30 Jul 2020 04:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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डॉक्टर डेथ - फोटो : अमर उजाला
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सौ से ज्यादा लोगों की हत्या करने का आरोपी डॉ. देवेंद्र शर्मा उर्फ डॉक्टर डेथ को आखिर पुलिस ने गिरफ्तार कर ही लिया। पुलिस के मुताबिक 100 कत्ल के बाद उसने गिनती करना छोड़ दिया। पुलिस उसे डॉक्टर डेथ, सीरियल किलर और हरियाणा का सबसे बड़ा जल्लाद नाम दिया है। वह कई राज्यों में फैले किडनी रैकेट से भी जुड़ा था। वह करीब 125 लोगों की किडनी अवैध रूप से निकालकर ट्रांसप्लांट कर चुका है। राजस्थान की जयपुर पुलिस को इसकी पैरोल जंपिंग मामले में तलाश थी।

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मगरमच्छों के लिए फेंक देते थे शव
बताते हैं कि फर्जी गैस एजेंसी बंद होने के बाद यह जयपुर चला गया और वर्ष 2003 तक क्लीनिक चलाया। यहां वह ऐसे लोगों के संपर्क में आया, जो अलीगढ़ के लिए टैक्सी किराए पर लेते और चालक की हत्या कर देते थे। उनके शव को कासगंज स्थित हजारा नहर में मगरमच्छों के लिए फेंक देते थे, ताकि कोई सबूत न मिले। ये टैक्सी को कासगंज में बेच देते थे या फिर मेरठ में कटवा देते थे। एक टैक्सी के बिकने या कटने पर डॉक्टर को 20 से 25 हजार रुपये मिलते थे। डॉक्टर का दावा है कि उसने 100 से ज्यादा टैक्सी चालकों की हत्या कराई। टैक्सी चालकों की हत्याओं को लेकर इसके खिलाफ दिल्ली, यूपी, हरियाणा व राजस्थान में मामले दर्ज हुए थे। यह गिरफ्तार हुआ, लेकिन सजा सिर्फ छह-सात केसों में ही मिली।

17 हत्याओं के बाद 15 लाख ही मिले थे
फरीदाबाद की एडीजे कोर्ट ने 12 मार्च, 2007 में कुछ टैक्सी चालकों की हत्या में डा. देवेन्द्र व उसके दो साथियों को दोषी माना था। टैक्सी चालक कमल शर्मा की हत्या का भी दोषी माना गया था। कोर्ट में उसने 20 टैक्सी चालकों की हत्या की बात स्वीकार की थी। इस समय पुलिस ने इसको साइको माना था। पुलिस ने कोर्ट में खुलासा किया था कि 17 टैक्सी चालकों की हत्या कर उसे सिर्फ 15 लाख रुपये ही मिले थे। 
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गैस एजेंसी खोलकर बांटे फर्जी कनेक्शन
डॉ. देवेंद्र शर्मा ने बिहार के सिवान से बीएएमएस की डिग्री ली थी। वर्ष 1984 में यह राजस्थान में जयपुर के बंादीकुई में जनता अस्पताल नाम से क्लीनिक चलाने लगा। इसने 11 वर्ष क्लीनिक चलाया। वर्ष 1982 में इसकी शादी हुई थी। वर्ष 1984 में इसने भारत गैस की एक स्कीम के तहत गैस एजेंसी की डीलरशिप लेने के लिए 11 लाख रुपये निवेश किए। इस एजेंसी की स्कीम में हजारों लोगों ने निवेश किया था। वह कंपनी हजारों निवेशकों के पैसे लेकर गायब हो गई। इसे काफी नुकसान हुआ। इसके बाद यह वर्ष 1995 में यूपी में अलीगढ़ के छारा गांव में भारत पेट्रोलियम के नाम से नकली गैस एजेंसी चलाने लगा। यह लखनऊ से कुछ गैस चूल्हे व सिलिंडर लेेकर आया और लोगों को फर्जी कनेक्शन देने लगा। इसी दौरान यह दलालपुर के राज, उदयवीर और वेदवीर के संपर्क में आया। ये चोरी व लूटपाट करते थे।

सिलिंडर ले जाने वाले ट्रकों को लूटा
इन लोगों ने गैस सिलिंडर ले जाने वाले ट्रकों को लूटने का भी धंधा किया। सिलिंडर ये डॉ. देवेंद्र कुमार शर्मा की फर्जी गैस एजेंसी में उतार देते थे। ट्रक ड्राइवरों व कंडक्टरों की हत्या कर देते थे और ट्रक मेरठ में कटवा देते थे। करीब एक-डेढ़ वर्ष बाद यह गिरफ्तार हो गया। इसके बाद यह अमरोहा में फर्जी गैस एजेंसी चलाने लगा। यहां कोतवाली थाने में इसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।

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पुलिस ने 2004 में किया था गिरफ्तार

गुरुग्राम और आसपास के इलाकों से टैक्सी चालक गायब होने लगे तो गुरुग्राम पुलिस ने टैक्सी स्टैंडों पर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी तैनात किए। डॉ. देवेंद्र को टैक्सी बुक करते हुए नौ फरवरी, 2004 को गिरफ्तार किया गया। उसने पुलिसकर्मियों से कहा कि वह 100 से ज्यादा कत्ल कर चुका है तो उनके होश उड़ गए थे। पुलिस कुछ ही हत्याएं होने की बात मानकर चल रही थी। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर उसे टैक्सी चालक नरेश वर्मा की हत्या के केस में 14 मई, 2008 को उम्रकैद की सजा हुई थी। यह हत्या इसने सोहना-गुरुग्राम रोड पर की थी। कई राज्यों की पुलिस ने पूछताछ की, मगर पता नहीं लग पाया कि डॉक्टर देवेंद्र शर्मा ने इतनी हत्याएं क्यों कीं। पुलिस उसके मानसिक रूप से बीमार होने की बात कहती है। इसी कारण भोंडसी जेल हो या जयपुर जेल, हर जगह कैदियों में उसका खौफ है।

जनवरी में मिला पैरोल तो कर गया जंप
आरोपी को राजस्थान के जयपुर में हत्या के एक केस में उम्रकैद की सजा हुई है। 16 वर्ष जेल में रहने के बाद जनवरी 2020 में इसे 20 दिन का पैरोल मिला। यह पेरोल जंप कर गया। वर्ष 2004 में पत्नी व बच्चे इसे छोड़कर चले गए थे। पैरोल मिलने के बाद वह अपने गांव गया। मार्च में यह दिल्ली आ गया और मोहन गार्डन में एक परिचित के घर में रहने लगा। इसके बाद इसने एक विधवा से शादी की और बापरौला में छिपकर रहने लगा। यह प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करने लगा। इस दौरान इसने जयपुर के एक प्रॉपर्टी डीलर को कनॉट प्लेस में मार्शल हाउस दिलाने के नाम पर ठगने का प्रयास किया। जयपुर पुलिस का कहना है कि इसके खिलाफ यूपी व हरियाणा में अलग-अलग थानों में 40 से 45 केस दर्ज हैं।

11 वर्ष में 125 लोगों की किडनी ट्रांसप्लांट
इसके बाद यह जयपुर, यूपी, बल्लभगढ़ व गुरुग्राम में फैले अलग-अलग किडनी रैकेट से जुड़ गया। यह सर्जरी करता था। किडनी रैकेट को लेकर इसके खिलाफ इन जगहों पर केस रजिस्टर्ड हुए। वर्ष 2004 में वह किडनी रैकेट कांड में गुरुग्राम से गिरफ्तार हुआ। यहां डॉ. अमित अनमोल नर्सिंग होम चलाता था। इस नर्सिंग होम में लोगों की किडनी अवैध रूप से निकालकर ट्रांसप्लांट की जाती थीं। डॉ. अमित को नेपाल से लाया गया था। इस मामले में और भी डॉक्टर गिरफ्तार हुए थे। आरोपी ने खुलासा किया है कि वर्ष 1994 से लेकर 2004 तक इन्होंने 125 लोगों की किडनी अवैध रूप से ट्रांसप्लांट की थीं। एक किडनी ट्रांसप्लांट करने पर इसे 5 से 7 लाख रुपये मिलते थे।
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