गुरुग्राम और आसपास के इलाकों से टैक्सी चालक गायब होने लगे तो गुरुग्राम पुलिस ने टैक्सी स्टैंडों पर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी तैनात किए। डॉ. देवेंद्र को टैक्सी बुक करते हुए नौ फरवरी, 2004 को गिरफ्तार किया गया। उसने पुलिसकर्मियों से कहा कि वह 100 से ज्यादा कत्ल कर चुका है तो उनके होश उड़ गए थे। पुलिस कुछ ही हत्याएं होने की बात मानकर चल रही थी। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर उसे टैक्सी चालक नरेश वर्मा की हत्या के केस में 14 मई, 2008 को उम्रकैद की सजा हुई थी। यह हत्या इसने सोहना-गुरुग्राम रोड पर की थी। कई राज्यों की पुलिस ने पूछताछ की, मगर पता नहीं लग पाया कि डॉक्टर देवेंद्र शर्मा ने इतनी हत्याएं क्यों कीं। पुलिस उसके मानसिक रूप से बीमार होने की बात कहती है। इसी कारण भोंडसी जेल हो या जयपुर जेल, हर जगह कैदियों में उसका खौफ है।
जनवरी में मिला पैरोल तो कर गया जंप
आरोपी को राजस्थान के जयपुर में हत्या के एक केस में उम्रकैद की सजा हुई है। 16 वर्ष जेल में रहने के बाद जनवरी 2020 में इसे 20 दिन का पैरोल मिला। यह पेरोल जंप कर गया। वर्ष 2004 में पत्नी व बच्चे इसे छोड़कर चले गए थे। पैरोल मिलने के बाद वह अपने गांव गया। मार्च में यह दिल्ली आ गया और मोहन गार्डन में एक परिचित के घर में रहने लगा। इसके बाद इसने एक विधवा से शादी की और बापरौला में छिपकर रहने लगा। यह प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करने लगा। इस दौरान इसने जयपुर के एक प्रॉपर्टी डीलर को कनॉट प्लेस में मार्शल हाउस दिलाने के नाम पर ठगने का प्रयास किया। जयपुर पुलिस का कहना है कि इसके खिलाफ यूपी व हरियाणा में अलग-अलग थानों में 40 से 45 केस दर्ज हैं।
11 वर्ष में 125 लोगों की किडनी ट्रांसप्लांट
इसके बाद यह जयपुर, यूपी, बल्लभगढ़ व गुरुग्राम में फैले अलग-अलग किडनी रैकेट से जुड़ गया। यह सर्जरी करता था। किडनी रैकेट को लेकर इसके खिलाफ इन जगहों पर केस रजिस्टर्ड हुए। वर्ष 2004 में वह किडनी रैकेट कांड में गुरुग्राम से गिरफ्तार हुआ। यहां डॉ. अमित अनमोल नर्सिंग होम चलाता था। इस नर्सिंग होम में लोगों की किडनी अवैध रूप से निकालकर ट्रांसप्लांट की जाती थीं। डॉ. अमित को नेपाल से लाया गया था। इस मामले में और भी डॉक्टर गिरफ्तार हुए थे। आरोपी ने खुलासा किया है कि वर्ष 1994 से लेकर 2004 तक इन्होंने 125 लोगों की किडनी अवैध रूप से ट्रांसप्लांट की थीं। एक किडनी ट्रांसप्लांट करने पर इसे 5 से 7 लाख रुपये मिलते थे।