इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने याची के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की थी। इसकी वजह से उन्हें अगस्त 1942 से दिसंबर 1946 तक भूमिगत रहना पड़ा था।
ब्रिटिश सरकार ने उन्हें अपराधी बताकर 1944 में भगोड़ा भी घोषित कर दिया था। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि 15 अगस्त 1947 को मिली आजादी के बाद सरकार ने स्वतंत्रता सेनानियों के कल्याण के लिए कई योजनाएं बनाई थीं।
इनमें से एसएसएस योजना भी एक थी। इन तथ्यों के मद्देनजर कोर्ट ने याची की पेंशन 12 फीसदी ब्याज और एक लाख रुपये हर्जाने के साथ चुकाने का निर्देश केंद्र सरकार को दिया है।