देश के सभी विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक सत्र 2019-20 में दाखिला लेने वाले सभी विद्यार्थियों और पेरेंट्स को अब हर वर्ष रैगिंग से दूर रहने का ऑनलाइन वचनपत्र (अंडरटेकिंग) भी देना होगा।
इसमें लिखा जाएगा कि वे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के एंटी रैगिंग रेगुलेशन 2016 (संशोधित) के नियमों का पालन करेंगे। विवि प्रबंधन को रैगिंग रोकने के लिए हॉस्टल, मैस, कैंटीन, टायलेट और बस स्टैंड का औचक निरीक्षण भी करना होगा। यदि कोई नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
यूजीसी के सचिव प्रो. रजनीश जैन की ओर से सोमवार को सभी राज्यों के मुख्य सचिव और 750 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र लिखा गया है। यूजीसी के नियमों को सेंट्रल, स्टेट, निजी, डीम्ड -टू-बी यूनिवर्सिटी समेत अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू करना अनिवार्य है।
इसमें आईआईटी, मेडिकल कॉलेज, आईआईएम, एनआईटी भी शामिल हैं। प्रो. जैन के मुताबिक, किसी भी छात्र (नए या पुराने) पर रंग, नस्ल, धर्म, जाति, नृजातीय, लिंग (ट्रांसजेंडर सहित), यौन झुकाव, रूपरंग, राष्ट्रीयता, क्षेत्रीयता, भाषायी पहचान, जन्मस्थान, निवास स्थान, आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर शारीरिक अथवा मानसिक गलत आचरण (जिसमें दंबगई व बहिष्करण शामिल हैं) आदि सभी रैगिंग की श्रेणी में आता है। इनमें से किसी भी शब्द का प्रयोग करने पर रैगिंग के तहत मामला दर्ज होगा।