उनकी मौत के बाद एम्स के ओआरबीओ विभाग के परामर्शदाताओं ने परिवार से संपर्क कर उन्हें अंगदान के बारे में बताया। इस दौरान उनके बेटे संतोष कुमार ने भी अंगदान पर सहमति जाहिर की। इसके बाद पुनर्प्राप्त अंगों को राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एनओटीटीओ) ने अंगदान की प्रक्रिया के तहत जरूरतमंद व्यक्तियों को राकेश से प्राप्त अंग आवंटित किए। राकेश से मिले लिवर और एक किडनी आरआर अस्पताल में भर्ती मरीजों को दी गई, जबकि दूसरी किडनी एम्स नई दिल्ली को आवंटित की गई थी। राकेश के हृदय वाल्व और कॉर्निया को एम्स में सुरक्षित रखा गया है।
इस मौके पर एम्स के ऑर्गन रिट्रीवल बैंकिंग ऑर्गनाइजेशन (ओआरबीओ) की प्रोफेसर प्रभारी डॉ. आरती विज ने कहा कि इस दुख की घड़ी में भी राकेश के परिवार ने अंगदान कर दूसरे के बारे में सोचा। उन्होंने मानवता के लिए काम किया। परिवार की सहमति के बाद ओआरबीओ, चिकित्सक, न्यूरोसर्जन, एनेस्थेटिस्ट, समन्वयक, तकनीशियन, प्रशासक, फोरेंसिक और पुलिस विभाग और नर्स समन्वयक ने मिलकर काम किया।