पंचायत चुनावों में शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेजों की जांच होने के मामले में मेवात में एक बार फिर से राजनैतिक सुगबुगाहट शुरु हो गई है। शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेजों की जांच शुरु होने के डर से नव निर्वाचित पंच सरपंचों के अभी से ही पसीने छूटने लगे हैं। इस क्रम में सरकार के आदेशों के बाद पंचायत चुनावों में जीत हांसिल करने वाले नव निर्वाचित उन सरपंचों एवं पंचों पर जांच की आंच गिर सकती है जिन्होंने मेवात से लगते राजस्थान और यूपी से चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक प्रमाण पत्र बनवाए थे। इस बीच ऐसे मामलों की सबसे अधिक शिकायतें मेवात प्रशासन एवं राज्य चुनाव आयोग के पास हैं।
गौरतलब है कि बीते दिन हुए पंचायत चुनावों में मौजूदा भाजपा शासित राज्य सरकार ने प्रदेश में पंचायत चुनावों में पहली बार पंच सरपंच पद के लिए शैक्षणिक योग्यता लागू कर दी थी। इस दौरान गांव का चौधरी बनने का शोक रखने वाले कुछ लोगों ने आनन फानन में इस शोक को पूरा करने के लिए मेवात के लगते राज्यों से फर्जी तरीके से शैक्षणिक प्रमाण पत्र बनवा लिए थे। नामांकन के समय इनपर शिकायत हुई तो कुछ के नामांकन पत्र रद्द हो गए थे जबकि कुछ मिलीभगत कर पंचायत चुनाव जीतने में कामयाब भी हो गए। अब पंचायत चुनाव संपन्न हो गए हैं तो इस मामले में शिकायतें भी खूब हो रही है। शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच की शिकायत के सबसे ज्यादा मामले इस समय मेवात में देखने को मिल रहें हैं। यहां जिला प्रशासन के पास ऐसे दर्जनों मामले हैं जिनकी जांच जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा गहनता से करवाई जा रही है। अब देखना यह होगा कि इस क्रम में शिकायत सही पाए जाने पर प्रशासन किस प्रकार की कार्रवाई ऐसे लोगों पर करता है जिनका शैक्षणिक प्रमाण पत्र पूरी तरीके से फर्जी है।
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