46 साल पहले आयोजित दीक्षांत समारोह में अभिनेता और थियेटर पर्सनेलिटी बलराज साहनी ने एक भाषण दिया था जिसे (सेंटर फॉर तुल्नात्मक राजनीति और राजनीतिक थियोरी) प्रोफेसर कमल मित्रा चेनोये ने उग्र भाषण बताया है।
साहनी के भाषण की ट्रांसस्क्रीप्ट के अनुसार, उन्होंने कहा था, मसीहा हमें साहस देता है अपनी दास्तां वाली मानसिकता को छोड़ने, मूल्य उत्न्न करने और एक स्वतंत्र और मुक्त देश के लिए हमें अपने भाग्य को उनसे जोड़ना होगा जो शासन करते हैं ना कि खुद शासित होते हैं।
इस बार के दीक्षांत समारोह का आइडिया है कि यह उन विवादास्पद स्थितियों को छोड़कर होगा जो कि पहले समारोह के मंच पर हुआ था।
तकरीबन दो प्रोफेसर और एक छात्र ने उस समय की सरकार को पूंजिवादी जमींदार कहा था। उसे एक अलग तरह का भाषण कहा जाता है जिसे तत्कालीन वीसी जी पारथासारथी ने मंजूरी दी थी। हालांकि इस बात की पुष्टि हिंदुस्तान टाइम्स ने पूरी तरह से नहीं की है।
चेनाए का कहना है कि मिडिया ने उस टॉपिक को उठा लिया था, क्योंकि एक छात्र के लिए इस तरह की चीजें कहना बहुत बड़ी बात थी।
हालांकि इस बार होने वाले दीक्षांत समारोह की तारीख अभी तक फाइनल नहीं हुई है, लेकिन रजीस्ट्रार ऑफिस के सर्कुलर के अनुसार यह फरवरी के आखिरी हफ्ते या मार्च के पहले हफ्ते में आयोजिक हो सकता है।
गारकोटी का कहना है कि हम सकारात्मकता को बढ़ावा देना चाहते हैं, क्यों केवल हमारे छात्र अपने पीएचडी के शोध जमा करें और चले जाएं?
जेएनयू स्टूडेंट यूनियन की प्रेजिटेंट गीता कुमारी का कहना है कि हमें दीक्षांत समारोह के होने से किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं है, पर यह उसपर निर्भर करता है जिसे गेस्ट बनाकर बुलाया जाएगा।
एक सबसे बड़ा सवाल यह है जिसे एक छात्र द्वारा पूछा गया कि क्या इतिहास इस साल कैंपस में खुद को दोहराएगा।