मंगलवार को गुरु नानक आई केयर सेंटर के 37वें स्थापना दिवस के अवसर पर केंद्र की निदेशक डॉ. कीर्ति सिंह ने बताया कि छोटे बच्चों को मोबाइल नहीं देना चाहिए। स्कूल स्क्रीनिंग प्रोग्राम के दौरान बच्चों में मायोपिया के मामले दिख रहे हैं। इन्हें चश्मा लगाने की सलाह दी जाती है, लेकिन ये चश्मा नहीं लगाते जिस कारण आगे चल कर नजरें और खराब हो जाती हैं।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद इसकी संख्या और बढ़ी है। हम बच्चों को सलाह देते हैं कि ऑनलाइन कक्षा लेने के दौरान आंखों को बीच-बीच में आराम दें। पानी पीते रहें। वहीं युवाओं की ड्राईनेस की शिकायत मिल रही है। इस मौके पर लेफिटनेंट जनरल दलजीत सिंह, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. पूनम के साथ डॉ. कीर्ति सिंह ने केंद्र के स्मारिका का भी विमोचन किया।
डॉक्टर व आंखों की जांच करने वालों को दे रहे ट्रेनिंग
काले मोतिया की पहचान करने के लिए गुरु नानक आई केयर सेंटर डॉक्टर व आंखों की जांच करने वालों को गनियोस्पोकी के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दे रहा है। इसकी मदद से काले मोतिया की पहचान की जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह अंधेपन को बढ़ाने में इसकी अहम भूमिका है। यदि समय से पहले इसकी जांच करवाएं तो इसे बढ़ने से रोका जा सकता है। इस बीमारी का कोई लक्षण नहीं है। यह चोर की तरह धीरे-धीरे आंखों में आता है। शुरू में साइड की रोशनी प्रभावित होती है। अंधेरे में नहीं दिखता।
डॉ. कीर्ति ने कहा कि यदि किसी के परिवार में काला मोतिया पहले रहा है तो उन्हें जांच करवानी चाहिए। इसके अलावा बीपी, मधुमेह के रोगी, 50 वर्ष से अधिक व अन्य को जांच जरूर करवानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक बार आंख की रोशनी गई तो वापस नहीं आ सकती। लेकिन जो हैं उसे बचाया जा सकता है।