इंडस्ट्रीयल माडल टाउन(आईएमटी) के किसानों के साथ प्रशासन की वार्ता फिर विफल रही। किसानों ने प्रशासन पर मांगों पर ढुलमुल रवैया अपनाने की आरोप लगाते हुए आईएमटी में चल रहे अनिश्चितकालीन धरने को जारी रखने की घोषणा की है।
किसानों के रुख को देखते हुए प्रशासन भी सक्रिय है। प्रशासन ने आइएमटी में धारा 144 लगा दी है। दरअसल, 21 अप्रैल से आईएमटी में पांच गांव के किसान धरने पर बैठे हुए हैं। किसानों का धरना खत्म कराने के लिए मंगवाला को जिला उपायुक्त ने बैठक बुलाई। करीब साढ़े तीन बजे फरीदाबाद एसडीएम कार्यालय में किसाना और प्रशासन के बीच वार्ता शुरू हुई।
दो घंटे चली मैराथन बैठक में कोई नतीजा नहीं निकल सका। प्रशासन की तरफ से एसडीएम महाबीर प्रसाद, एचएसआईआईडीसी के सीएफओ राजेश शर्मा, उप महाप्रबंधक विकास चौधरी और कार्यकारी अभियंता डीएस भट्टी मौजूद थे।
किसानों ने एचएसआईआईडीसी पर समय से भुगतान न करने का आरोप लगाया। आईएमटी किसान संघर्ष समिति के प्रधान रामनिवास नागर ने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा सितंबर 2014 के फैसले के बावजूद अभी भी किसानों का 1025 करोड़ रुपये भुगतान बाकी है।
इसपर एसडीएम ने एचएसआईआईडीसी के सीएफओ राजेश शर्मा से भुगतान के बारे में पूछा। सीएफओ ने बताया कि किसानों को भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जैसे जैसे कोर्ट में केस लगेगा, उसके अनुसान मुआवजा बांट दिया जाएगा। सीएफओ की इस बात पर किसान बिफर गए।
किसानों ने आरोप लगाया कि एचएसआईआईडीसी की ढुलमुल नीतियों के कारण डेढ़ साल बाद भी किसान सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। एकमुश्त बकाया भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया।
किसानों ने आइएमटी में चल रहे अनिश्चितकालीन धरने का जारी रखने की घोषणा की। बैठक में हरियाणा किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष डीके शर्मा, कुलदीप यादव, जयपाल सूबेदार, ओमपाल टोंगर, आदेश नागर, वीर सिंह सहित अनेक किसान मौजूद थे।