सीबीआई की विशेष अदालत में शुक्रवार को यूपी के मानवाधिकार आयोग विभाग में तैनात एडीजी एमके बशाल की निठारी कांड से जुड़े एक मामले में गवाही हुई। विशेष न्यायाधीश अमित वीर सिंह की अदालत में पेश होकर एडीजी ने कहा कि उन्होंने ही सब इंस्पेक्टर बीपी सिंह के खिलाफ डीआईजी मेरठ के पद पर रहते हुए सीबीआई को उसके खिलाफ केस चलाने की अभियोजन स्वीकृति दी थी। इस बात की उन्होंने अदालत में पेश होकर पुष्टि की। वहीं, तत्कालीन सब इंस्पेक्टर बीपी सिंह इन दिनों मुजफ्फरनगर के भोपा थाने में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात है। कोर्ट में अगली सुनवाई एक अगस्त को होगी।
सीबीआई कोर्ट से मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2007 में हुए निठारी कांड में मृतकों के परिजनों ने सेक्टर 20 के तत्कालीन थानेदार बीपी सिंह पर डी-5 कोठी मालिक मोनिंदर सिंह पंधेर से रुपये लेने का गंभीर आरोप लगाया था। कोर्ट ने इस पर फिर से जांच कराने के आदेश दिए। इसके कुछ दिनों बाद ही सीबीआई ने आरोप पत्र पेश किया। इसमें सब इंस्पेक्टर बीपी सिंह को भ्रष्टाचार अधिनियम का आरोपी बनाया गया।
कोर्ट ने बीपी सिंह को तलब किया था। तब बीपी सिंह ने हाईकोर्ट से सीआरपीसी की धारा 319 की इस कार्यवाही को खत्म करा दिया, लेकिन आरोप पत्र मामले में वह वांछित रहे। वहीं, 17 जनवरी को बीपी सिंह ने विशेष न्यायाधीश अमित वीर सिंह की अदालत में आत्म समर्पण कर दिया था। इसके बाद से उन्हें जमानत मिल गई थी।