फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एसिड पीड़ितों की ‘मिनी मार्केट’ इंदिरापुरम में

Wed, 24 Feb 2016 12:46 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
एसिड अटैक का दंश झेल रहीं पीड़िताएं अब अपने पैरों पर खड़ी होंगी। जिला प्रशासन ने इंदिरापुरम के हैबीटेट सेंटर में एसिड पीड़िताओं के लिए मिनी मार्केट शुरू करने की तैयारी की है।
विज्ञापन


इसमें जनपद के नामचीन ब्रांड एक ही स्थान पर लोगों को मिलेंगे। साथ ही सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का आयोजन भी किया जाएगा।

जनपद में कुल सात एसिड पीड़िताएं हैं। इनमें से पांच मंगलवार को एडीएम सिटी प्रीति जायसवाल से मिलने पहुंची थीं। एसिड पीड़िताओं के लिए कार्य कर रही संस्था छांव फाउंडेशन के डायरेक्टर आशीष शुक्ला इनका नेतृत्व कर रहे थे।

इनकी सबसे बड़ी शिकायत आर्थिक तंगी को लेकर थी। शासन से मिलने वाले उपचार और आर्थिक मदद भी इन्हें नहीं मिल रही।

एडीएम सिटी प्रीति जायसवाल ने बताया कि प्रशासन इनको अपने पैरों पर खड़ा करेगा। इसके लिए लोगों के ज्यादा आवागमन वाले स्थान पर इनका मिनी मार्केट बनवाया जाएगा।
विज्ञापन


फिलहाल इंदिरापुरम के हैबीटेट क्लब का चयन किया गया है। इसमें फूड कार्नर, ब्यूटी पार्लर, ब्रांडेड कपड़ों के शोरूम, खाद्य पदार्थों, मसालों, मिठाइयों आदि के ब्रांडेड शॉप खुलवाई जानी हैं।

इसके लिए प्रशिक्षण के साथ ही बैंक लोन भी दिलाया जाएगा। लोगों को इनके बाजार की ओर आकर्षित करने के लिए प्रशासन सामाजिक संस्थाओं का सहयोग लेगा।

शनिवार को इनके साथ दोबारा से मीटिंग की जाएगी। आग-धुआं से इनको परेशानी होती है, ऐसे में खाना तैयार कराने का कोई काम नहीं कराया जाएगा।

एक दिन का रहेगा च्वाइस टू पे सिस्टम
एसिड पीड़िताओं के मार्केट में सप्ताह में एक दिन सांस्कृतिक गतिविधियां चलवाई जाएंगी। बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की पहल प्रशासन करेगा।

इसके साथ ही सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से च्वाइस टू पे सिस्टम रविवार को लागू किया जाएगा। जिससे लोगों का आकर्षण बढ़ सके। आगरा में इस तरह का सिस्टम शुरू किया गया है।

जानिए इनका दर्द
एसिड पीड़िताओं बिन्नी खन्ना, शाइस्ता, अभिषेक, सोनिया आदि ने एडीएम को बताया कि कोर्ट ट्रायल में तेजी लाने की व्यवस्था कराई जाए। शासन और सुप्रीम कोर्ट को हमारी अपील भेजकर फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना कराई जाए। शासन से मिलने वाली धनराशि की औपचारिकता आसान कराकर जल्द दिलाई जाए।

जेपी अस्पताल में उपचार की व्यवस्था कराई जाए। सरकारी अस्पतालों में यथोचित उपचार नहीं मिल रहा है। सामाजिक प्रतिष्ठा और आरोपियों के बदले के डर से कोई किराए पर मकान देने को तैयार नहीं होता है, इसके लिए आवास योजना में इनको घर दिए जाएं।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें